शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

कश्‍मीर में मुस्लिम महिलाएं दोबारा कर सकेंगी निकाह

श्रीनगर। 
जम्मू कश्मीर में पिछले कई सालों से गायब अपने पतियो का इंतजार कर रही महिलाओं को मुस्लिम धार्मिक गुरूओं ने बड़ी राहत दी है। उन्होंने गुरूवार को दिए एक फतवे में उन महिलाओं को दोबारा निकाह (शादी) करने की इजाजत दे दी है जिनके पति पिछले चार या उससे अधिक सालों से गायब हैं। दो दशक पहले घाटी में आतंक पनपना शुरू हुआ था जिसके कारण कई महिलाओं के पति गायब हो गए थे। ये धार्मिक धर्मगुरू ऎसी महिलाओं के दोबारा निकाह करने को लेकर आयोजित एक समारोह में हिस्सा लेने आए थे।
समारोह का आयोजन करने वाले गैर सरकारी संगठन "एहसास" के प्रमुख बशीर अहमद डार ने कहा कि धार्मिक गुरू इस बात के समर्थन में थे कि राज्य में पिछले दो दशक में आतंकी घटनाओं के कारण जिन महिलाओं के पति इस दौरान गायब हुए, वे गायब होने के चार साल बाद दोबारा निकाह कर सकेंगी।
मामले को लेकर तीन चरणों में चली मंत्रणा के बाद धार्मिक गुरू इस बात पर राजी हो गए कि जो महिलाएं दोबारा निकाह करना चाहती हैं, वे गायब होने के चार साल बाद ऎसा कर सकती हैं। ऎसे मामलों में संपत्ति को लेकर कोई भी फैसला पवित्र कोरान और हदीश में दिए गए नियमों के अनुसार लिया जाएगा।
देश में लागू मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939 के तहत मुस्लिम कानून के तहत जिस महिला ने निकाह किया है, वह तलाक के लिए अर्जी दायर कर सकती है अगर उसका पति चार या उससे अधिक समय से गायब है। इस फतवे का महिलाओं ने खुलकर समर्थन किया है।

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