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रविवार, 2 दिसंबर 2018

2 December: तीन दशक कम नहीं होते एक अभिशाप के साथ जीने के लिए

आज 2 दिसंबर पर राष्‍ट्रीय प्रदूषण दिवस मनाया जा रहा है, ये एक सिर्फ तारीख  भर नहीं है, बल्‍कि आज तीन दशक पहले घटे उस मंजर की भयावहता है जो तीन  पीढ़ियां गुजरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ रही। जी हां, भोपाल गैस त्रासदी के  बाद तीन तीन पीढ़ियां अपंगता के साथ साथ आज भी अपना अस्‍तित्‍व खोज रही  हैं। तीन दशक कम नहीं होते एक अभिशाप के साथ जीने के लिए या यूं कहें कि  जिंदा दिखते रहने के लिए।

जब जब भोपाल गैस त्रासदी की बात होगी तो सरकारी गैरजिम्‍मेदारी के साथ-साथ  समाजसेवी संगठनों की गालबजाऊ संस्कृति की भी बात होगी ही। क्‍योंकि राष्‍ट्रीय  व अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर इस त्रासदी को भुनाने के लिए तमाम समाजसेवी संगठन  वजूद में आ गए जिन्‍हें सिर्फ ''विचार विमर्श'' करने के नाम पर भारी अनुदान  मिला और तमाम देशी-विदेशी चिंतक अपनी चिंता से इस ''त्रासदी'' को भुनाने  लगे। इन्‍होंने गैस कांड के प्रभावित लोगों पर आई आंच को साल दर साल भुनाने,  और हर 2 दिसंबर को गोष्‍ठियां कर सत्‍तारूढ़ सरकार को गरियाने के अलावा कुछ  भी ऐसा नहीं किया जो प्रभावितों को सामान्‍य जीवन का अनुभव करा सके।

हर विषय को राजनीति और खांचों में बांट देने वाले हमारे देश की मौजूदा  स्‍थितियों में कम से कम अब तो लोगों को समझ लेना चाहिए कि अपनी लड़ाई  सदैव स्‍वयं ही लड़नी होती है। जो इस मुगालते में रहते हैं कि कोई कथित  सामाजिक संगठन उनका हित करेगा, वह अपना समय नष्‍ट करते हैं। तो यह  भ्रांति कम से कम अब उन्‍हें अपने दिमाग से निकाल देनी चाहिए क्‍योंकि इन  संगठनों के मुंह अनुदानों की हड्डी लगी हुई है। 

इस संदर्भ में सुभषितरत्नाकर का एक श्‍लोक मुझे बेहद सटीक जान पड़ रहा है ...

उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि  न मनोरथैः  |
नहि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे  मृगाः ||

अर्थात् परिश्रम करने से ही सारे कार्य सिद्ध हो सकते हैं, केवल सोचने से नहीं।  जिस प्रकार सोते हुए सिंह के मुँह में हिरण कभी अपने आप प्रवेश नहीं करता।  कहने का आशय यह है कि शेर के मुँह में अपने आप ही शिकार नहीं आता, उसे  शिकार करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। इस सुभाषित में उद्यमिता  के  महत्व को प्रतिपादित किया गया है...।

इसी तरह गैस त्रासदी की पीड़ित पीढ़ियों को सरकारों व एनजीओ की ओर देखना  छोड़ अब अपने लिए और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने ही स्‍तर पर  चौतरफा प्रयास करने होंगे। चाहे वो ज़मीन में घुसे प्रदूषणकारी कैमिकल्‍स को दूर  करने की बात हो, गलते शरीरों को संभालना हो या आर्थिक स्‍थिति की बात हो,  अब निर्भरता नहीं स्‍वयं का उद्यम करना होगा। देशी विधाओं के ज़रिए अपना  इलाज़ स्‍वयं करने के साथ साथ अपनी भावी पीढ़ियों को स्‍वयं उद्यम करके खड़ा  होने की ओर जाना होगा। बेचारगी को भुनाने वालों से सावधान रहना होगा।

आज तीन दशक बाद भी भोपाल गैस कांड पर प्रभावितों को समझना होगा कि जो  स्‍वयं अपनी सोच नहीं रखते अथवा अपने प्रयास नहीं करते, वे मोहरे तो बन  सकते हैं, स्‍वयंसिद्ध नहीं बन सकते। अपने अधिकार और  रहम के बीच जितना  फंसेंगे, उतना ही उबरने में देर लगेगी।

- अलकनंदा सिंह

 



बुधवार, 21 मार्च 2018

बीसवेंं अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कार घोषित

भोपाल । साठ महत्वपूर्ण ग्रंथोंं के सर्जक एवं चार सौ चित्रों के चित्रकार स्व. अम्बिका प्रसाद दिव्य की स्मृति में विगत उन्नीस वर्षो से दिये जा रहे राष्ट्रीय ख्याति के दिव्य पुरस्कारो की घोषणा उनकी जन्म जयन्ती 16मार्च 2018 को साईंनाथ नगर, महाबली कोलार, भोपाल स्थित साहित्य सदन में आयोजित एक सादा समारोह में श्री जगदीश किंजल्क ने की ।
इस वर्ष के पुरस्कारों में उपन्यास विधा में श्रीमती कुसुम खेमानी (कोलकाता ) को उनके उपन्यास ” जडिया बाई ” को दिया जायेगा । द्वितीय और तृतीय क्रम में आने वाले उपन्यास में ” हेमू ” ( डॉक्टर तारकेश्वर उपाध्याय ) ” मोतीहारी एवं चतुर्भुज ” (डॉक्टर अरविंद जैन भोपाल ) को दिव्य प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जायेंगे । व्यंग्य विधा में श्री सुदर्शन सोनी (भोपाल ) को उनकी कृति आरोहण के लिए दिया जायेगा । इसके साथ ही दिव्य प्रशस्ति पत्र पाने वाले व्यंग्यकार हैं श्री आलोक सक्सेना (दिल्ली ) उनकी कृति ” पप्पू बन गया अफसर ” एवं बिहारी दुबे ( पन्ना ) को उनकी कृति ” चौंकना मना है ” के लिये प्रदान किये जायेंगे ।कहानी विधा में वीकानेर की इंजीनियर श्रीमती आशा शर्मा को उनकी कृति ” उजले दिन मटमैली शामें ” को दिव्य पुरस्कार प्रदान किया जायेगा ।
दिव्य प्रशस्ति पत्र पाने वाली लेखिकायेंं हैं डॉक्टर सुमन लता श्रीवास्तव (जबलपुर ) कृति ” कटघरे “
काव्य विधा में कविता के साथ नयी कविता एवं गजल विधा को शामिल किया गया है नयी कविता के लिए सुश्री लक्ष्मी रूपल , जीरकपुर ( पंजाब ) की कृति ” तेरा पानी मेरा पानी ” को दिव्य पुरस्कार प्रदान किया जायेगा । अहमदाबाद के घमंडी राम किशोर मेहता, कृति “अंधेरे का समाजवाद ,”श्री गंगा शरण प्यासा (मरैना ) कृति ” गंगा हजारिका ” श्री ब्रज श्रीवास्तव( विदिशा ) को उनकी कृति ” ऐसे दिन का इंतजार “तथा श्री शैलेंद्र सिंह शैल कति ” तन्हा साया ” को प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जायेंगे । बाल साहित्य के अंतर्गत भोपाल के डाक्टर परशुराम शुक्ल को उनकी कृति ” परमचंद के कारनामे ” के लिये दिव्य पुरस्कार प्रदान किया जायेगा । इसी क्रम में प्रशस्ति पत्र गुडगांव के श्री घमंडीलाल अग्रवाल को उनकी कृति “नये निराले गीत ” के लिये दिया जाएगा ।
निबन्ध विधा का दिव्य पुरस्कार जबलपुर की लेखिका डॉक्टर तनूजा चौधरी को उनकी कृति साठोत्तर लेखिकाओं का ” स्त्री-विमर्श ” के लिये दिया जाएगा एवं दिव्य प्रशस्ति पत्र चौन्ने की डॉक्टर ए . फातिमा को उनकी कृति “डॉक्टर विश्व नाथ त्रिपाठी के साहित्य में चित्रित ग्रामीण जीवन सभ्यता के लिए दिया जायेगा । इस वर्ष देश के विभिन्न अंचलोअं से दिव्य पुरस्कारों हेतु 156 पुस्तकें प्राप्त हुईं ।
राष्ट्रीय ख्याति के दिव्य पुरस्कारों के सम्मानीय निर्णायक
विद्वान हैं – श्री रामदेव भारद्वाज (कुलपति ) 2- श्री प्रभु दयाल मिश्र 3- डॉक्टर राधा बल्लभ शर्मा 4- श्री घनश्याम सक्सेना 5- डॉक्टर विनय राजाराम 6- श्री मयंक श्रीवास्तव 7- श्रीमती विजय लक्ष्मी विभा 8-राजेन्दर नागदेव 9 – श्री हरि जोशी 10- श्री पी.डी खैरा 11- श्री अरुण तिवारी 12- श्री राधेलाल विजघावने 13- डॉक्टर सुनीता खत्री 14- श्री राग तैलंग 15-श्री मती राजो किंजल्क ।
स्मरणीय है कि राष्ट्रीय ख्याति के दिव्य पुरस्कार विगत बीस वर्षो से प्रदान किये जा रहे हैं । संयोजक श्री जगदीश किंजल्क ने बताया कि इक्कीसवे दिव्य पुरस्कारों के लिये कृतियाँ शीघ्र ही आमंत्रित की जायेंगी ।
प्रस्‍तुति: अलकनंदा सिंह

गुरुवार, 3 सितंबर 2015

दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की तैयारियां जोर शोर से शुरू

भोपाल। दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन की तैयारियां जोर शोर से जारी हैं जिसका आयोजन यहां 10 से 12 सितंबर के बीच किया जाएगा और जिसमें हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन आकषर्ण का मुख्य केंद्र होंगे ।
दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन में समकालीन मुद्दों और विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रशासन और विदेश नीति, विधि, मीडिया आदि के क्षेत्रों में हिंदी के सामान्य प्रयोग और विस्तार से संबंधित तौर तरीकों पर चर्चा होगी। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘हिंदी जगत: विस्तार एवं संभावनाएं’ है।
ताल-तालाबों की नगरी भोपाल में होने वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे तो समापन समारोह में गृह मंत्री राजनाथ सिंह पधारंेगे। समापन समारोह में बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन भी आकषर्ण का मुख्य केन्द्र होंगे।
सम्मेलन के आयोजन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करने के लिए परामर्श, प्रबंधन और कार्यक्रम से संबंधित तीन समितियां गठित की गई हैं। परामर्श एवं कार्यक्रम समितियों की अध्यक्ष विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हैं जबकि प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विदेश राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृ}ा) डॉ. वी.के. सिंह हैं।
मध्य प्रदेश राज्य सरकार सम्मेलन की स्थानीय आयोजक है और मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री, शिवराज सिंह चौहान मुख्य संरक्षक हैं। सम्मेलन के लिए माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल भागीदार संस्था है।
विश्व हिंदी सम्मेलन की संकल्पना राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा द्वारा 1973 में की गई थी। संकल्पना के फलस्वरूप, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के तत्वावधान में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 से 12 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था। इसके बाद विश्व हिंदी सम्मेलन दो बार पोर्ट लुई (मॉरीशस) में, दो बार भारत में, पोर्ट ऑफ स्पेन (ट्रिनिडाड एण्ड टोबेगो), लंदन, पारामारिबो (सूरीनाम), न्यूयार्क (अमेरिका) और जोहांसबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में आयोजित किया जा चुका है ।