मंगलवार, 4 अगस्त 2026

एक कदम आयुर्वेद की ओर: आज बात करेंगे जामुन की... जिसका हर अंग औषधि है


 
आजकल मैं एलोपैथी से आज‍िज आए अपने हेल्थ सेक्टर की दुर्दशा देखकर होम्योपैथी व आयुर्वेेद का कुछ कुछ अध्ययन कर रही हूं ..इसी कड़ी में  आज जामुन के करतबों की बात करना बहुत जरूरी लगा..तो सोचा शेयर करूं क‍ि इस नायाब औषध‍ि और बहुमूल्य प्राकृत‍िक देन को हम कि‍तना  कम कर के आंकते रहे...।    
बरसात के मौसम में बाजारों में नजर आने वाला गहरे बैंगनी रंग का जामुन केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आयुर्वेद और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण वृक्ष माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसकी जड़, छाल, पत्तियां, फल और लकड़ी—हर हिस्सा किसी न किसी रूप में उपयोगी है। यही कारण है कि इसे “औषधीय गुणों का भंडार” कहा जाता है।
अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं।
जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है।
पहले के जमाने में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामून की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जमोट कहते है।
दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहाँ जल के स्तोत्र बंद नहीं हुए हैं।
भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहाँ लकड़ी की वो तख्ती साबुत है जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुँओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था।
स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है।
एक रिसर्च के मुताबिक, जामुन के पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। ऐसे में जामुन की पत्तियों से तैयार चाय का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
सबसे पहले आप एक कप पानी लें। अब इस पानी को तपेली में डालकर अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इसमें जामुन की कुछ पत्तियों को धो कर डाल दें। अगर आपके पास जामुन की पत्तियों का पाउडर है, तो आप इस पाउडर को 1 चम्मच पानी में डालकर उबाल सकते हैं। जब पानी अच्छे से उबल जाए, तो इसे कप में छान लें। अब इसमें आप शहद या फिर नींबू के रस की कुछ बूंदे मिक्स करके पी सकते हैं।
जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं. इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है। जामुन की पत्तियों को सुखाकर टूथ पाउडर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं. इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं जो मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते हैं। मुंह के छालों में जामुन की छाल के काढ़ा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। जामुन में मौजूद आयरन खून को शुद्ध करने में मदद करता है।

जामुन की गुठली सेहत के लिए बहुत गुणकारी होती है। यह मुख्य रूप से ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन तंत्र सुधारने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है।
जामुन की लकड़ी न केवल एक अच्छी दातुन है अपितु पानी चखने वाले (जलसूंघा) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल कि‍या जाता था ।
जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटेड मेडीकल साइंसेज में वाहरा पी. , रेडेकर एस., पवार एस., पाट‍िल वी. ने अपनी र‍िसर्च में कहा है क‍ि - 

पौधों ने कई सदियों से इंसानों को हर्बल कॉस्मेटिक्स दिए हैं और समय के साथ उनका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। सिज़ीगियम क्यूमिनी, जो मायर्टेसी परिवार से है और जिसे आमतौर पर यूजेनिया जंबोलाना के नाम से जाना जाता है, फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होता है। जामुन या ब्लैक प्लम, भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है, जिसमें श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। यह पेड़ ट्रॉपिकल और सबट्रॉपिकल क्लाइमेट में फलता-फूलता है, और अक्सर जंगलों, नदी के किनारों और खुले खेतों में उगता है। जामुन के कॉस्मेटिक फायदों पर हाल ही में की गई जांच इस रिव्यू का मुख्य टॉपिक है। जामुन के इन फॉर्मूलेशन की खासियत यह है कि इनमें एंटी-एजिंग, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट जैसे फायदेमंद गुण होते हैं, और ये फोटोएजिंग को भी कम करते हैं। मुख्य फाइटोकॉन्स्टिट्यूएंट्स में टैनिन, फ्लेवोनोइड्स, टेरपेनोइड्स, सैपोनिन, फेनोलिक एसिड और एसेंशियल ऑयल्स शामिल हैं। सिज़ीगियम क्यूमिनी फार्माकोलॉजिकल और आयुर्वेदिक दोनों तरह के फायदे दिखाता है, जो कॉस्मेटिक फॉर्मूलेशन में एक कीमती हिस्सा है। लिटरेचर रिव्यू और अलग-अलग रिसर्च स्टडीज़ के अनुसार, सिज़ीगियम क्यूमिनी (पत्ती) और (बीज) तेलों में एंटीकोलेजनेज, एंटी-इलास्टेस और एंटी-हायल्युरोनिडेस एक्टिविटीज़ देखी गईं। इसलिए, हेल्दी स्किन के लिए कॉस्मेटिक तैयारियों में एस. क्यूमिनी तेलों पर विचार किया जाना चाहिए। जामुन कॉस्मेटिक और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री दोनों में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

चूं क‍ि आयुर्वेद किसी एक बीमारी के लिए फिक्स दवा नहीं बताता, बल्कि शरीर की प्रकृति के अनुसार इलाज करता है। तो पहले अपने शरीद की प्रकृत‍ि समझें... तब जामुन को लेकर उक्त तथ्य अपनी जरूरत अनुसार प्रयोग क‍िये जा सकते हैं। दैन‍िक जीवन में भी जामुन की लकड़ी, गुठली का बुरादा आद‍ि को इस्तेमाल में लाकर देखें... गजब का र‍िजल्ट देते हैं। 



- अलकनंदा स‍िंंह 


रविवार, 2 अगस्त 2026

#गोखरू: एक ऐसी जड़ी बूटी है जो सदियों से मानव स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद ही साबित हुआ


हर जगह आजकल इस मौसम में बहुतायत में हैं गोक्षुर या गोखरू । ये छोटा गोखरू है।  

दो तरह का होता है छोटा एवं बड़ा गोखरू 

नपुंसकता और किडनी रोगों का काल है गोखरू :- शीघ्र उत्पादन करेंगे गोखरू निर्मित योग का

गोखरू वर्षा ऋतु में जमीन पर फैलकर बढ़ने वाला, शाखा-प्रशाखायुक्त पौधा होता है। इसके तने 1.5 मी लम्बे, और जमीन पर फैले हुए होते हैं। शाखाओं के नये भाग मुलायम होते हैं; पत्ते चने के पत्तों के समान, परन्तु आकार में कुछ बड़े होते हैं। इसके फूल पीले, छोटे, चक्राकार, कांटों से युक्त, चमकीले लगभग 0.7-2 सेमी व्यास या डाइमीटर के होते हैं।

इसके फल छोटे, गोल, चपटे, पांच कोण वाले, 2-6 कंटक युक्त व अनेक बीजी होते हैं। इसकी जड़ मुलायम रेशेदार, 10-15 सेमी लम्बी, हल्के भूरे रंग के एवं थोड़े सुगन्धित होते हैं। गोखुरू अगस्त से दिसम्बर महीने में फलते-फूलते हैं।

गोखरू में पोटेशियम, नाइट्रेट, विटामिन सी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फ्लेवोनोइड्स, सैपोनिन्स, एल्कलॉइड्स, और खनिज तत्व जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं. ये सभी पोषक तत्व शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते है विशेषकर नाइट्रेट जो कि 

रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता है जिससे सभी जीवन अंगों को बल मिलता है हृदय तथा यौन अंगों को बल मिलता है 

सैपोनिन्स यौन स्वास्थ्य और हार्मोन संतुलन में जबर मदद करते हैं जिससे पुरूषों तथा महिलाओं दोनों को ही यौनेच्छा की कमी महसूस नहीं होती 

एल्कलॉइड्स को मूत्रवर्धक प्रभाव के लिए जाना जाता है और किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करता है तथा मूत्रमार्ग की परेशानियां दूर करते हैं 

गोखरू में मौजूद कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम जैसे खनिज तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने और मांसपेशियों की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं.

टेस्टोस्टेरान हार्मोन ही वो हार्मोन है जो एक पुरुष को मर्द बनाता है उसके यौनांग मांसपेशियों के विकास और रखरखाव का जरिया है 

गोखरू को टेस्टोस्टेरोन बूस्टर के रूप में जाना जाता है, जो पुरुषों के लिए बहुत जरूरी होता है। टेस्टोस्टेरोन एक हार्मोन है, जो पुरुषों के यौन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं पुरुषों की मांसपेशियों को बढ़ाने, हड्डियों को मजबूत करने और पुरुषों के प्रजनन क्षमता को बेहतर रखने में मदद करता है।

2 ग्राम गोखुर के फल चूर्ण को 2-3 नग सूखे अंजीर के साथ दिन में तीन बार कुछ दिनों तक लगातार सेवन करने से दमा में लाभ होता है। गोक्षुर तथा अश्वगंधा को समान मात्रा में लेकर उसके सूक्ष्म चूर्ण में 2 चम्मच मधु मिलाकर दिन में दो बार 250 मिली दूध के साथ सेवन करने से सांस संबंधी समस्या एवं कमजोरी में लाभ मिलता है।

 गोखरू का काढ़ा पिलाने से जिसकी पाचन शक्ति कमजोर है उसको भोजन पचाने में आसानी होती है। गोखरू के 30-40 मिली काढ़ा   में 5 ग्राम पीपल के चूर्ण का मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पीने से पाचन-शक्ति बढ़ती है। यह गोखरू का उपयोग बड़ा लाभकारी है।

गोखरू के सेवन से पथरी को प्राकृतिक तरीके से निकालने में मदद मिलती है। 5 ग्राम पतंजलि गोखरू चूर्ण को 1 चम्मच मधु के साथ दिन में तीन बार खाने के बाद ऊपर से बकरी का दूध पिलाने से अश्मरी टूट-टूट कर निकल जाती है। या फिर सीधे ही गोखरू पंचांग स्वरस को 30 मिली सुबह निराहार एक गिलास पानी के साथ लिया जाए तो पित्ताशय तथा आंतों के साथ साथ गुर्दों की भी सफाई होती है तथा बनी कश्मीरी यानी पत्थरियां निकल जाती हैं

अगर किसी कारण गर्भाशय में दर्द हो रहा है तो गोखरू का सेवन बहुत गुणकारी होता है। 5 ग्राम गोखरू फल, 5 ग्राम काली किशमिश और दो ग्राम मुलेठी इनको पीसकर सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय के दर्द से राहत मिलती है।

अगर स्पर्म काउन्ट कम होने के कारण आपके पिता बनने में समस्या उत्पन्न हो रही है तो गोखरू का सेवन इस तरह से करें। गोखरू के 20 ग्राम फलों को 250 मिली दूध में उबालकर सुबह शाम पिलाने से स्पर्म या वीर्य संबंधी समस्याएं कम होती है। इसके अलावा 10 ग्राम गोखरू एवं 10 ग्राम शतावर को 250 मिली दूध के साथ उबालकर पिलाने से स्पर्म का काउन्ट और क्वालिटी बढ़ती है तथा शरीर को शक्ति मिलती है।  या फिर कैप्सूल में भरकर 500 mg प्रति दूध के साथ जल के साथ लिया जा सकता है

250 ग्राम गोखरू फल को दो लीटर पानी में उबालना है जब तक वो आधा न रह जाए फिर इसे छानकर बोतल में भरकर रख लें 

30-30-30 मिली सुबह दोपहर शाम आधा कप पानी मिलाकर पिएं किडनी संबंधित बीमारियों में तथा बढ़े हुए क्रिएटिनिन और यूरिया में आशातीत लाभ होता है युरिनरी ट्रैक इंफेक्शन और पेशाब की रूकावट दूर होती है शुरूआती किडनी रोग का अचूक उपाय है 

गोखरू एक नर्वाइन टॉनिक के रूप में काम करती है, जो नसों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के साथ अनिद्रा, तनाव और चिंता से राहत दिलाने में भी फायदेमंद है।


साभार:  

डॉ० जयवीर सिंह

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