आजकल मैं एलोपैथी से आजिज आए अपने हेल्थ सेक्टर की दुर्दशा देखकर होम्योपैथी व आयुर्वेेद का कुछ कुछ अध्ययन कर रही हूं ..इसी कड़ी में आज जामंन के करतबों की बात करना बहुत जरूरी लगा..तो सोचा शेयर करूं कि इस नायाब औषधि और बहुमूल्य प्राकृतिक देन को हम कितना कम कर के आंकते रहे...।
बरसात के मौसम में बाजारों में नजर आने वाला गहरे बैंगनी रंग का जामुन केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आयुर्वेद और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण वृक्ष माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसकी जड़, छाल, पत्तियां, फल और लकड़ी—हर हिस्सा किसी न किसी रूप में उपयोगी है। यही कारण है कि इसे “औषधीय गुणों का भंडार” कहा जाता है।
अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं।
जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है।
पहले के जमाने में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामून की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जमोट कहते है।
दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहाँ जल के स्तोत्र बंद नहीं हुए हैं।
भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहाँ लकड़ी की वो तख्ती साबुत है जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुँओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था।
स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है।
एक रिसर्च के मुताबिक, जामुन के पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। ऐसे में जामुन की पत्तियों से तैयार चाय का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
सबसे पहले आप एक कप पानी लें। अब इस पानी को तपेली में डालकर अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इसमें जामुन की कुछ पत्तियों को धो कर डाल दें। अगर आपके पास जामुन की पत्तियों का पाउडर है, तो आप इस पाउडर को 1 चम्मच पानी में डालकर उबाल सकते हैं। जब पानी अच्छे से उबल जाए, तो इसे कप में छान लें। अब इसमें आप शहद या फिर नींबू के रस की कुछ बूंदे मिक्स करके पी सकते हैं।
जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं. इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है। जामुन की पत्तियों को सुखाकर टूथ पाउडर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं. इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं जो मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते हैं। मुंह के छालों में जामुन की छाल के काढ़ा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। जामुन में मौजूद आयरन खून को शुद्ध करने में मदद करता है।
जामुन की गुठली सेहत के लिए बहुत गुणकारी होती है। यह मुख्य रूप से ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन तंत्र सुधारने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है।
जामुन की लकड़ी न केवल एक अच्छी दातुन है अपितु पानी चखने वाले (जलसूंघा) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता था ।
जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटेड मेडीकल साइंसेज में वाहरा पी. , रेडेकर एस., पवार एस., पाटिल वी. ने अपनी रिसर्च में कहा है कि -
चूं कि आयुर्वेद किसी एक बीमारी के लिए फिक्स दवा नहीं बताता, बल्कि शरीर की प्रकृति के अनुसार इलाज करता है। तो पहले अपने शरीद की प्रकृति समझें... तब जामुन को लेकर उक्त तथ्य अपनी जरूरत अनुसार प्रयोग किये जा सकते हैं। दैनिक जीवन में भी जामुन की लकड़ी, गुठली का बुरादा आदि को इस्तेमाल में लाकर देखें... गजब का रिजल्ट देते हैं।
- अलकनंदा सिंंह
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