शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

वर्ष 2021: ऑनलाइन ज़‍िंदगी का ”ये” सबसे बड़ा खतरा


 प‍िछला साल विदा हुआ, और वह अपने साथ उन घटना-दुर्घटनाओं की भी विदाई कर ले गया जो इत‍िहास में दर्ज हो गईं हैं, वह भी अपने सबसे अध‍िक भयानक रूप में…। इन दुर्घटनाओं में से एक है कोरोना जैसी महामारी का प्रकोप, परंतु इस महामारी ने ज‍िंदग‍ियों को ही नहीं बदला बल्क‍ि पूरे व‍िश्व में कार्य-संस्कृत‍ि को भी बदल द‍िया। सब कुछ ऑनलाइन हो गया…ज‍िंदगी भी ऑनलाइन ही बढ़ती गई, और यही ऑनलाइन ज‍िंदगी अपने साथ अनेक अपराधों को समेटकर चलती रही… इन अपराधों में सबसे ज्यादा प्रसार‍ित होने वाला व‍िषय रहा ‘पोर्न’।

इससे संबंध‍ित कुछ वाकये हमें सोचने को व‍िवश कर देते हैं क‍ि सभ्यता का आख‍िर हम कौन सा मानदंड अपनी अगली पीढ़‍ियों को सौंपने जा रहे हैं। सभ्य समाज के असभ्य आचरण पर हम रोते तो बहुत हैं, उपदेश भी देते हैं परंतु कड़वा सच तो ये हैं क‍ि हममें से अध‍िकांश इसी ”असभ्यता” के वाहक भी हैं। अकसर ऐसे अपराधों के ल‍िए हम जाह‍िलों व अनपढ़ों को ज‍िम्मेदार बताते हैं परंतु है इसका ठीक उल्टा।


अब देख‍िए ना… प‍िछले हफ्ते से एक खबर आ रही है क‍ि ”अमेजन-क‍िंडल का पब्ल‍िश‍िंग प्लेटफॉर्म” अपने ओपन एंड फ्री पब्ल‍िश‍िंग सुव‍िधा का उपयोग पोर्न परोसने में कर रहा है। दरअसल, इस प्लेटफॉर्म पर कोई भी व्यक्त‍ि अपने साह‍ित्य को स्वयं पब्ल‍िश कर सकता है ब‍िल्कुल सोशल मीड‍िया की भांति और इसी का फायदा उन व‍िकृत मानस‍िकता वाले ‘सुनीता सरन’ और ‘पब‍िश स‍िंह’ के छद्म नाम वाले लेखकों ने उठाया जो पब्ल‍िकली पोर्न को परोस रहे हैं जबक‍ि वे यह भलीभांत‍ि जानते हैं…क‍ि एडल्ट ही नहीं अब बच्चे भी अपनी पढ़ाई सह‍ित अन्य कार्य ऑनलाइन ही न‍िबटा रहे हैं।

‘सुनीता सरन’ और ‘पब‍िश स‍िंह’ जैसे छद्म लेखकों की ‘रेप साहित्य’ संबंधी इन क‍िताबों में ह‍िंदू मह‍िलाओं और मुस्ल‍िम पुरुष के संबंधों को टारगेट क‍िया गया है, जो क‍ि अपने आप में प्रोपेगंडा है। मैंने तो ये बस दो उदाहरणभर द‍िए हैं, लेकिन अमेजन के किंडल एडिशन पर साहित्य के बहाने तमाम तरह की अश्लील और रेप कल्चर को डिफाइन करने वाली सामग्री मौजूद हैं। शर्मनाक बात यह है कि इसमें खास कर मुस्लिम युवकों और हिंदू महिलाओं का प्रमुख रूप से जिक्र किया गया है, ये ज‍िक्र ही द‍िखाता है क‍ि मात्र मह‍िलाओं के प्रत‍ि घृण‍ित सोच ही नहीं, इनके ज़र‍िए अश्लीलता व सांप्रदाय‍िक घृणा फैलाने को जानबूझकर माध्यम बनाया गया ताक‍ि क‍िंडल पर पढ़ने वालों के द‍िमाग को यौन‍िक अपराध के ल‍िए उकसाया जा सके।

ऐसे ही क‍िंडल प्लेटफऑर्म पर Indian Hindu wife’s affair with her Muslim lover नाम की किताब अनलिमिटिड सब्सक्रिप्शन पर फ्री में पढ़ने के लिए मौजूद है। इस किताब की लेखिका का नाम नीलिमा स्टिवन्स है। 35 पृष्ठों की किताब के कवर पेज में एक व्यक्ति इस्लामी टोपी पहने दिखता है। वहीं महिला डीप क्लिवेज दिखाते हुए बिंदी लगाए नजर आती है। रिपोर्ट कहती है कि इस लेखक के नाम पर किंडल में 20 किताब मौजूद हैं। किंडल पर मौजूद ऐसी किताबों के शीर्षक पढ़कर कहाँ से लग रहा है कि इनका मकसद समाज को साहित्य के नाम पर उसका आइना दिखाना है। वो भी तब जब आए दिन हिंदू महिलाएँ कट्टरपंथियों की बर्बरता का शिकार हो रही हैं। इन किताबों के शीर्षक भर पढ़ लेने से ऐसा लगता है जैसे रेप आदि का महिमामंडन किया जा रहा हो।

हालांक‍ि अमेजन-क‍िंडल पर पब्ल‍िश हुई इन पोर्न क‍िताबों का इस तरह ऑनलाइन सबके ल‍िए उपलब्ध होने और ह‍िंदू- मुस्ल‍िम का जानबूझकर ज‍िक्र क‍िये जाने पर अब राष्ट्रीय मह‍िला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा  ने संज्ञान ल‍िया है और उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए अमजेन के वरिष्ठ अधिकारी अमित अग्रवाल को ऐसी सामग्रियों पर रोक लगाने के लिए कहा है जिनमें महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध को बढ़ावा दिया गया हो और स‍िर्फ एक ही समुदाय के लिए गलत संदेश जाता हो।

ऑनलाइन अपराध का एक ऐसा ही मामला मुरादाबाद से सामने आया है ज‍िसमें धार्म‍िक और नववर्ष के शुभकामना संदेशों की इमेज के माध्यम से जो पोर्न वीड‍ियो सोशल मीड‍िया पर भेजे जा रहे हैं। वे अपने भीतर कई ‘स्टेनोग्राफी संदेश’ छुपाए रहते हैं ज‍िन्हें ‘डीकोड’ करने पर पता चला क‍ि ये आतंक‍ियों के संदेश थे और स्लीपर सेल को भेजे गए थे। मुरादाबाद का, चूंक‍ि देश में अभी तक घट‍ित होने वाली आतंकी घटनाओं से पुराना संबंध रहा है इसल‍िए स्टेनोग्राफी संदेशों का बधाई-अभ‍िवादन संदेशों में लपेटकर ‘पोर्न वीड‍ियो’ की शक्ल में भेजा जाना बहुत बड़ी साज‍िश है। पोर्न वीड‍ियो को इसील‍िए माध्यम बनाया गया क्योंक‍ि इसके प्रत‍ि अध‍िकाध‍िक तथाकथित ”सभ्य” समाज आकर्ष‍ित रहता है।

कुल म‍िलाकर बात ये है क‍ि अमेजन-क‍िंडल पर पब्ल‍िश हुई पोर्न क‍िताबें हों या पोर्न वीड‍ियो में छुपे आतंकी संदेश …ये तो मात्र उदाहरण भर हैं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग का। दुरुपयोग भी ऐसा-वैसा नहीं, बल्क‍ि संस्कृत‍ि और सुरक्षा के ल‍िए अपने दानवी रूप में जो हमें अनेक कोणों पर चौकन्ना रहने का संदेश भी देता है। चूंक‍ि अब इस ऑनलाइन संस्कृत‍ि से दूर तो रहा नहीं जा सकता मगर इसके दुष्प्रभावों-चुनौत‍ियों से कुछ सतर्क रहकर इससे बचा अवश्य जा सकता है।

नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ आज बस इतना ही।

-  अलकनंदा स‍िंंह 

21 टिप्‍पणियां:

  1. ज्ञानवर्धक पोस्ट... सही कहा कि ऑनलाइन दुनिया में सतर्क रहने की जरूरत है... आभार...

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  2. बहुत सुन्दर और सारगर्भित।
    नव वर्ष 2021 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  3. ऑनलाइन की चीजों को सही दिशा में ले जाने के कार्य तेजी से होने चाहिए इससे पहले की देर हो जाये.
    सार्थक, सटीक.
    हैप्पी न्यू इयर :)
    नई रचना समानता २

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    1. धन्यवाद रोह‍ितास जी, आपकी नई रचना भी बहुत खूब ल‍िखी गई है ...माँ के घर बेटी का मेहमां हो जाना जुर्म है
      घर को उसका अपना घर न होने देना जुर्म है
      जबरदस्ती का अन्यत्र समायोजन जुर्म है
      पली बडी लडकी पर अधिकार करना
      घिनोना ही नहीं जुर्म है...एकदम कड़वा सच ल‍िख द‍िया आपने

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  4. बहुत ही महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक लेख.....
    ऑनलाइन होने वाले अपराधों को रोकने की दिशा में सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

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  5. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना आज 2 जनवरी 2021 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन " पर आप भी सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद! ,

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  6. उत्तर
    1. डा. वर्षा जी, नमस्कार
      आपकी ट‍िप्पणी बहुमूल्य है

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  7. अति चिंतनीय विमर्श । सारे खतरों के बावजूद ऑनलाइन कार्यशैली जीवन का जिस तरह से हिस्सा बन गया है उसमें सावधान रहना ही चाहिए । हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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  8. ऑनलाइन दुनिया में सतर्क रहने की जरूरत है । महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक लेख । नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं अलकनंदा जी।

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  9. आपका कहना सही है ... ऐसा साहित्य न सिर्फ नफरत फैलाने के नाम पर होता है ... बल्कि सस्ती लोकप्रियता के लिए होगा अहि ... इनका संगान लेना बहुत जरूरी है ...

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