बुधवार, 23 अगस्त 2017

बेबी बंप: एक्‍सपोज...एक्‍सपोजर...एक्‍सपोज्‍ड


एक्‍सपोजर पाने को एक्‍सपोज्‍ड होने की ललक आपको किस-किस तरह से एक्‍सपोज करेगी, यह अगर  देखना है तो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उन तस्‍वीरों को देख लीजिए जिनमें बॉलीवुड की  अप्‍सराएं स्‍वयं को खपाए दे रही हैं।

इस मानसिकता को समझने में खलील ज़िब्रान की यह कहानी काफी मदद कर सकती है-

एक दिन 'खुबसूरती' और 'बदसूरती' एक समुद्र तट पर मिलीं और बोलीं आओ, चलो समुद्र में नहाते हैं।  दोनों समुद्र में नहाने लगीं, कुछ देर बाद 'बदसूरती' पानी से निकली और तट पर आकर खूबसूरती के  कपड़े पहन कर चलती बनी। कुछ देर बाद 'खूबसूरती' भी तट पर आई, उसे अपने कपड़े नहीं मिले तो  उसे अपनी नग्‍नता पर लज्‍जा आ गई, उसने 'बदसूरती' के ही कपड़े पहने और अपने रास्‍ते चली गई।

आज तक आदमी और औरतें दोनों को पहचानने में भूल कर जाते हैं। फिर भी कुछ लोग हैं जिन्होंने  'खूबसूरती' के चेहरे को देखा है और वे उसे उसके बदसूरत वस्‍त्रों के बावजूद पहचान जाते हैं, कुछ लोग हैं जो बदसूरती के चेहरे को पहचानते हैं और उसके चकमक कपड़े उनकी आंखों को धोखा नहीं दे सकते।

ज़िब्रान साहब की ये कहानी सिर्फ कहानीभर नहीं है, यह पूरे के पूरे मानव दर्शन, उसकी इच्‍छाएं व भ्रम  को दिखाती है।यह दिखाती है कि जितना अंतर नग्‍नता और अश्‍लीलता में होता है, उतना ही अंतर नग्‍नता और खूबसूरती में भी होता है।

बॉलीवुड में आजकल एक चलन है कि अभिनेत्रियां अपनी गर्भावस्‍था यानि बेबी बंप के प्रत्‍येक चरण का  सरेआम प्रदर्शन करती हैं, इनके दीवाने सोशल साइट पर इनके पिक्‍चर्स आते ही टूटकर इनके कसीदे  पढ़ने लगते हैं। अब दीवाने हैं तो कसीदे पढ़ेंगे ही, मगर बेबी बंप के साथ इनकी तस्‍वीरें ज़िब्रान साहब  की 'बदसूरती' द्वारा खूबसूरती के कपड़े पहनने वाली फितरत को सही ठहराती हैं।
गर्भावस्‍था की तस्‍वीरें, स्‍तनपान कराती तस्‍वीरें, होड़ के स्‍तर तक बेबी-शॉवर (गोदभराई) के दौरान अपने  प्रेग्‍नेंसी गाउन को खींचकर स्‍पेशली बेबी बंप दिखाने का शौक पागलपन की हद तक देखा जा रहा है।

सी-बीच पर बिकनी फोटो, अभिनेत्री-अभिनेता के किस करते फोटो के बाद अभिनेत्री-अभिनेत्री के बीच  लेस्‍बी-किस के फोटो से ऊबीं ये अभिनेत्रियां वायरल होने की चाह में ''छा जाने'' की हवस के कारण  गर्भावस्‍था जैसे नितांत व्‍यक्‍तिगत और गरिमामयी अनुभव को इस फूहड़ता से प्रदर्शित कर रही हैं कि  गर्भावस्‍था अश्‍लील नज़र आने लगी है।

फिल्‍मों में नकार दी गई हों या बड़े घराने से ताल्‍लुक रखती हों, ''इमेज-कैश'' करने को इनके द्वारा  कराया गर्भावस्‍था का फोटोसेशन इनके लिए एक ''शगल'' भर है जो बाजार और मीडिया को अपनी ओर  आकर्षित करने का हुनर बखूबी जानता है।

अभिनेत्रियों के ''गर्भ'' के हर माह का क्रमवार प्रदर्शन करने वाली ये तस्‍वीरें सिर्फ गर्भावस्‍था का ही  मजाक नहीं उड़ातीं, बल्‍कि उनकी ये तस्‍वीरें उन महिलाओं का मजाक उड़ाती नजर आती हैं जो अपने  गर्भ का प्रदर्शन करना तो दूर उसको सहेजती हैं... संभालती हैं... संवारती हैं... ताकि आने वाला मेहमान  पूरी गरिमा के साथ संसार में जन्‍म ले सके। यह तस्‍वीरें उन महिलाओं का भी मजाक उड़ती नज़र  आती हैं जो इस दौरान भी अपने परिवार का पोषण करने को रातदिन लगी रहती हैं। अकसर दिख  जाऐंगीं ऐसी तस्‍वीरें जहां महिला कामगार अपने गर्भ के साथ ईंटों को अपने सिर पर रखे होगी।  बॉलीवुड की ये 'मॉम' उन महिलाअधिकारवादियों की सोच पर प्रश्‍नचिन्‍ह भी लगाती हैं जो ''बोल्‍डनेस''  के नाम पर बेची जा रही इस ''फूहड़ता'' को नजरंदाज़ किए हुए हैं। वस्‍त्रहीन होना खूबसूरती का पैमाना  नहीं हो सकता। यदि ऐसा होता तो आज भी महिलाएं-नवयौवनाएं ''मधुबाला'' होने की चाहत नहीं रखतीं,  आज भी कपड़ों में लकदक ढंकी मीनाकुमारी और नरगिस की ऊंचाई कोई अभिनेत्री क्‍यों नहीं पा सकी, यह सोचना होगा।

बहरहाल, अभिनेत्रियों से तो ''समाज के लिए'' कुछ भी सोचने या करने की आशा करना भी बेमानी है  मगर फेमिनिस्‍ट्स, मीडिया के साथ साथ अभिनेत्रियों की इस फूहड़ता को लेकर यदि हम भी नग्‍नता  और खूबसूरती में अंतर नहीं कर पा रहे हैं और आधुनिकता या 'बोल्‍डनेस' के शब्‍दजाल में अपनी सोच  को 'रैपअप' कर स्‍वयं को स्‍वतंत्र बता रहे हैं तो यह समाज की सोच को ही अश्‍लीलता की ओर ले  जाना होगा। इन अभिनेत्रियों की तस्‍वीरों को वायरल करके ज़रा सोचिए कि हम अपनी पीढ़ियों को  एक्‍सपोज और एक्‍सपोजर के नाम पर वल्‍गैरिटी का ये कौन सा पाठ पढ़ा रहे हैं।

और अंत में-
माफ करना खलील ज़िब्रान, आपकी ''खूबसूरती'' को विचारों की नग्‍नता का जामा पहनाकर इसे सोशल मीडिया पर बेचा भी जा रहा है और ''बदसूरती'' को बेबी-बंप के नाम पर भुनाया जा रहा है।सेलिब्रिटीज द्वारा दिखाया जा रहा बेबी बंप दरअसल स्‍वतंत्रता के नाम पर अपनी गुमनामी से डरे हुओं द्वारा खुद को लाइमलाइट में लाने का एक ढकोसलाभर है और कुछ नहीं।

-अलकनंदा सिंह