शनिवार, 9 जनवरी 2016

रवींद्र कालिया नहीं रहे

नई दिल्‍ली। वरिष्ठ साहित्यकार रवींद्र कालिया अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्हें लीवर में शिकायत के बाद पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
पिछले बुधवार को उनकी हालत में सुधार के बाद उन्हें वेंटिलेटर से बाहर कर दिया गया था लेकिन आज सुबह एक बार फिर उनकी तबीयत बिगड़ गई।
उनके निधन के समाचार से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनकी पत्नी ममता कालिया भी एक प्रख्यात साहित्यकार हैं। उनकी बीमारी के दौरान उनके पुत्र मनु कालिया उनके साथ थे।
हिंदी साहित्य में रवींद्र कालिया की ख्याति उपन्यासकार, कहानीकार और संस्मरण लेखक के अलावा एक ऐसे बेहतरीन संपादक के रूप में थी जो मृतप्राय: पत्रिकाओं में भी जान फूंक देते थे।
रवींद्र कालिया हिंदी के उन गिने-चुने संपादकों में से एक थे, जिन्हें पाठकों की नब्ज़ और बाज़ार का खेल दोनों का पता था।
रवींद्र कालिया के प्रमुख कथा संग्रह और उपन्यासों पर एक नजर…
कथा संग्रह
नौ साल छोटी पत्नी
गरीबी हटाओ
गली कूंचे
चकैया नीम
सत्ताइस साल की उमर तक
ज़रा सी रोशनी
उपन्यास
खुदा सही सलामत है
ए.बी.सी.डी.
17 रानडे रोड
संस्मरण
स्मृतियों की जन्मपत्री
कामरेड मोनालिसा
सृजन के सहयात्री
गालिब छुटी शराब
व्यंग्य संग्रह
नींद क्यों रात भर नहीं आती
राग मिलावट माल कौंस
कहानियाँ
दस प्रतिनिधि कहानियाँ
इक्कीस श्रेष्ठ कहानियाँ
रवींद्र कालिया को मिले सम्मान
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का प्रेमचंद स्मृति सम्मान
मध्यप्रदेश साहित्य अकादेमी द्वारा पदुमलाल बक्शी सम्मान
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्था न द्वारा साहित्यनभूषण सम्मान
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा लोहिया सम्मान
पंजाब सरकार द्वारा शिरोमणि साहित्य सम्मान

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