मंगलवार, 3 नवंबर 2015

राम का जन्म अयोध्या में नहीं, डेरा इस्माइल खान में हुआ

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सीनियर मेंबर अब्दुल रहीम कुरैशी ने अपनी किताब में भगवान राम के जन्म के बारे में नया दावा किया है।कुरैशी ने ‘फैक्ट्स ऑफ अयोध्या एपिसोड (मिथ ऑफ राम जन्मभूमि)’ टाइटल से किताब लिखी है। इसमें उन्होंने लिखा है कि भगवान राम का जन्म भारत के अयोध्या में नहीं, बल्कि डेरा इस्माइल खान में हुआ था जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान में है।
क्या है किताब का मकसद?
कुरैशी के मुताबिक वे इस किताब के जरिए राम जन्मभूमि विवाद पर जागरूकता लाने की कोशिश करेंगे। उनका कहना है कि वे अपने रिसर्च को शेयर करने के लिए हिंदू नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे बाबरी मस्जिद केस में AIMPLB भी एक पक्ष है। कुरैशी बोर्ड के असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी और स्पोक्सपर्सन हैं।
क्या दावे किए गए हैं किताब में?
* भगवान राम का जन्म डेरा इस्माइल खान में हुआ।
* यह क्षेत्र पुराने नॉर्थ-वेस्ट इंडिया का हिस्सा था। आजादी और बंटवारे के बाद यह पाकिस्तान में है।
* वहां आज भी एक स्थान का नाम रहमान देहरी है। इसे पहले राम देहरी कहा जाता था।
* किताब के मुताबिक वेद-पुराण में गंगा के मैदानी इलाके में कहीं भी राम के जन्म या उनके साम्राज्य का जिक्र नहीं है।
* राम जन्मभूमि विवाद अंग्रेजों की वजह से पैदा हुआ।
* राम के साम्राज्‍य की पहचान ‘सप्‍त सिंधु’ के जरिए की गई है। यह क्षेत्र अभी के हरियाणा-पंजाब से लेकर पाकिस्‍तान और पूर्वी अफगानिस्‍तान तक फैला हुआ है।
किताब के मुताबिक कब जन्मे थे राम?
* किताब में लिखा गया है कि हिंदू धर्म में युगों की जो मान्यता है, उसके मुताबिक श्रीराम का जन्म 24वें या 28वें त्रेता युग में माना जाता है। यानी यह वक्त करीब 1.8 करोड़ साल पहले का है। दुनियाभर में कहीं भी इतने पुराने युग के कोई अवशेष नहीं हैं।
* वहीं, रामायण में लिखी गई जगहों के मुताबिक राम का जन्म 5561 ईसा पूर्व से 7323 ईसा पूर्व से बीच का माना जाता है। लेकिन यूपी के अयोध्या और आसपास के इलाकों में 600 ईसा पूर्व से पहले के कोई सबूत नहीं मिलते।
बाबरी मस्जिद के बारे में लेखक का क्या दावा है?
* कुरैशी ने कहा- राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाए जाने की कहानी अंग्रेजों ने गढ़ी थी। अंग्रेज हिंदू-मुस्लिमों के बीच दरार लाना चाहते थे।
* गोस्वामी तुलसीदासजी ने अयोध्या में रामचरितमानस लिखी थी। उन्हीं के सामने मस्जिद थी। लेकिन उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि राम मंदिर के अवशेषों पर मस्जिद बनाई गई है।
* इस किताब के लेखक कुरैशी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक और मेंबर कमाल फारूकी ने दावा किया कि इनमें से कुछ तथ्य तो कोर्ट के सामने भी पेश किए जा चुके हैं। हम कोर्ट के आदेश से परे नहीं जा रहे लेकिन हम चाहते हैं कि सच सामने आए। यह मुद्दा राजनीति का नहीं है। यह मुद्दा धर्म और आस्था का है।
क्या है विवाद?
अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद 1949 से चल रहा है। इसमें 7 पक्ष हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने विवादित स्थल को भगवान राम का जन्मस्थल बताया था। विवादित जगह का दो-तिहाई हिस्सा हिंदुओं और एक-तिहाई हिस्सा मुस्लिमों को देने को कहा था। लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। मई 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। मामला अभी भी पेंडिंग है।