शुक्रवार, 7 मार्च 2014

'इंडिया : द स्टोरी यू नेवर वॉन्टेड टु हियर'

आज अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस है। तमाम बखानों के संग और औरतों के लिए लिखने- बोलने- कसीदे पढ़ने , उनसे प्रेम और विश्‍वास की कामना पालने वाले पुरुषों की सोच की बखिया उधेड़ती इस रिपोर्ट को ज़रा पढ़ें.....

पिछले दिनों अमेरिका के शिकागो यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट की भारत में स्टडी ट्रिप के दौरान सेक्शुअल हरासमेंट की खौफनाक कहानी नेट पर छाई रही। मिशेला क्रॉस नाम की यह स्टूडेंट पिछले साल एक स्टडी ट्रिप के दौरान भारत आई थीं। इस दौरान जहां वह भारत की खूबसूरती और अन्य चीजों ने काफी प्रभावित हुईं, वहीं उन्होंने भारत को महिलाओं के लिए अनसेफ भी बताया।
उन्होंने कुछ महीनों की अपनी ट्रिप के दौरान खुद के सेक्शुअल हरासमेंट के भी आरोप लगाए। उन्होंने भारत को ट्रैवलर्स के लिए स्वर्ग और महिलाओं के लिए नरक बताया। अमेरिका लौटने के बाद उन्होंने इन सारी बातों को एक वेबसाइट पर 'इंडिया : द स्टोरी यू नेवर वॉन्टेड टु हियर' नाम से लिखा, जिसमें सारी बातों का जिक्र है। उनके ट्रिप की कहानी उन्हीं की जुबानी :
'जब लोग मुझसे पूछते हैं कि भारत में पढ़ने का मेरा अनुभव कैसा रहा तो मैं असमंजस में पड़ जाती हूं। कोई कैसे वहां की उन परिस्थितियों के बारे में बता सकता है जिसने पिछले कुछ महीनों के दौरान मेरी जिंदगी को तबाह कर दिया है, और वह भी महज एक वाक्य में।
मैं मानती हूं कि भारत बहुत खूबसूरत और बढ़िया है, लेकिन महिलाओं के लिए काफी खतरनाक भी। क्या मुझे लोगों को सिर्फ यही बताना चाहिए कि किस तरह हमने पुणे में गणेश उत्सव में डांस किया। या यह भी कि जब अमेरिकी महिलाओं ने डांस करना शुरू किया तो कैसे गणेश उत्सव रुक गया और हमारे चारों तरफ लोगों का घेरा बन गया जो हमारे हर मूव की फिल्मिंग कर रहे थे।
क्या मुझे यह भी बताना चाहिए कि जब हम एक बाजार में साड़ी खरीदने के दौरान मोलभाव कर रहे थे तो कैसे कुछ लोग हमारे ब्रेस्ट को घूर रहे थे और आहें भर रहे थे। जब लोग मेरे इंडियन सैंडल्स की तारीफ करते हैं तो क्या मुझे यह बताना चाहिए कि किस तरह जिस शख्स से मैंने सैंडल्स खरीदा वह अगले 45 मिनट तक मेरा पीछा करता रहा।
तीन महीने तक मैं ऐसी ही परिस्थितियों में रही। एक वैसे देश में जो ट्रैवलर्स के लिए स्वर्ग और महिलाओं के लिए नरक है। जहां मेरा पीछा किया गया, मुझे घूरा गया, मुझे देखकर आहें भरी गईं। '


तो ये कोई कहानी नहीं हैं बल्‍कि हमें हर रोज ऐसी समस्‍याओं से दोचार होने की एक ऐसी बानगी है जिसे किसी विदेशी महिला द्धारा अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कुछ यूं बताया गया कि भारतीय पुरुषों के सारे संस्‍कार धुल गये।
आज के दिनमिशेला क्रॉस का  ये सच, इतना बताने के लिए काफी है कि प्रेम, पवित्रता और दंभी ढकोसलों के बीच से भी औरत इनका सच जान जाती है । ये अलग बात है कि मिशेला विदेशी हैं और उन्‍होंने मीडिया के रास्‍ते अपना अनुभव बताया इसलिए ये इतना छाया भी रहा । बहरहाल जहां तक बात है हमारे देश में औरतों की तो भारतीय पुरुषवर्ग अब भी स्‍वयं को यह नहीं समझा पा रहा है कि 'औरत' खुद भी कुछ सोच सकती है..अब भी वह गाइड की भूमिका में है। वह हिदायतें देता नहीं थकता कि ऐसा करो वैसा मत करो..आदि। वो पहचानती है कि कौन क्‍या सोचता है।घर हो या बाहर...औरत कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रही है।
 अब देश में औरत  'तुम भला क्‍या कर सकती हो' को भलीभाांति चुनौती देने का माद्दा रखती है ...सो प्‍लीज! हमें हमारी सोच और हौसलों के साथ आगे बढ़ने दो..दंभ से भरी हिदायतें देने का दौर कबका गुजर गया। हम मिशेला क्रॉस भले ही ना हों मगर उससे कम भी तो नहीं।

- अलकनंदा सिंह

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