गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

मारीशस की गुफा में बनेगा प्रभु राम का चित्रमय मंदिर, अनुमति मिली

मारीशस की एक सदियों पुरानी गुफा में प्रभु राम का चित्रमय मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। कुंभ के बाद मूर्तियां और भित्ति चित्र बनाने का काम शुरू होगा। इसके लिए वहां की सरकार से मंजूरी मिल गई है। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर उमाकांतानंद सरस्वती ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए मारीशस में भी अलख जगा दी है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हजारों की संख्या में भक्त आने को तैयार हैं। मंदिर निर्माण शुरू होने पर वे कार सेवा करने जरूर आएंगे।
जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी उमाकांतानंद सरस्वती ने कुछ सालों पहले मारीशस के पौ बोजे के पहाड़ी इलाके में शाश्वतम इंटरनेशनल शांतिनिकेतन की स्थापना की तो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि वहां सदियों पुरानी एक गुफा मिल जाएगी। करीब डेढ़ सौ मीटर लंबी गुफा को जैसे प्रकृति ने अपने हाथों से संवारा है। उसमें पहाड़ से उतरती एक छोटी सी धारा और पेड़ पौधे भी हैं।
गुफा में थोड़ी ही देर बैठने पर किसी भी व्यक्ति में ऊर्जा का अनुभव होने लगता है। उमाकांतानंद ने वहां पर प्रभु राम के जीवन से संबंधित झांकियां और मूर्तियों से सुसज्जित मूर्तियों का मंदिर बनाने के लिए अपने भक्तों से बात की। वहां के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ को यह प्रस्ताव बताकर सरकार से अनुमति मांगी गई। जल्द ही मारीशस सरकार ने गुफा में प्रभु राम का मंदिर बनाने की अनुमति दे दी। प्रधानमंत्री के पिता अनिरुद्ध जुगनाथ भी मारीशस के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
अनिरुद्ध और उनकी पत्नी सरोजनी ने भी स्वामी उमाकांतानंद से दीक्षा ले चुके हैं। अनिरुद्धा और सरोजनी ने भी वहां प्रभु राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार से सिफारिश की थी। गुफा में रामायण से संबंधित झांकियां, मूर्तियां, भित्ति चित्र पत्थरों पर उकेरे जाएंगे। दीवारों पर रामायण की चौपाइयां भी लिखी जाएंगी। उमाकांतानंद ने बताया कि वह भारत से लेकर मारीशस तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मुहिम चला रहे हैं। मारीशस में उनके हजारों भक्त तैयार बैठे हैं कि कब अयोध्या में मंदिर निर्माण शुरू हो और कब वे कार सेवा के लिए अयोध्या जाएं।
पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध की पत्नी के नाम पर होगा मंदिर
कुंभ नगर। मारीशस के पौ बोजे की सदियों पुरानी गुफा में प्रस्तावित मंदिर पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जुगनाथ की पत्नी सरोजनी के नाम पर होगा। उमाकांतानंद ने जब वहां की सरकार को गुफा में मंदिर बनाने का प्रस्ताव दिया था तो सरोजनी ने उनकी बहुत मदद की थी। उनके और अनिरुद्ध जुगनाथ के प्रयासों के फलस्वरूप वहां के मंत्रिमंडल से इसकी अनुमति मिल गई। इसी कारण मंदिर का सरोजनी के नाम से करने का निर्णय लिया गया है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-02-2019) को "प्रेम का सचमुच हुआ अभाव" (चर्चा अंक-3242) पर भी होगी।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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