यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति 7 मई, 1945 को हुई जब जर्मन सशस्त्र बलों ने मित्र राष्ट्रों के सामने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण अगले दिन, 8 मई को प्रभावी हुआ मगर इस बीच प्रभावित लोगों ने इंसान की क्रूरता का हर वो पहलू देख लिया था जिसके दिए जख्मों को आज जमाना बीत जाने के बाद भी नहीं भरा जा सका। इसीबीच एक तस्वीर सामने आई तो सोचा कि इसे सभीे के साथ शेयर करूं।
हिटलरशाही के खिलाफ खड़े रहकर फांसी का फंदा गले में डलवाने वाली #LepaRadić की है ये तस्वीर, वो एक #Bosnian टीनेजर थी जिसे #WorldWarII के दौरान #Nazis को गोली मारने के लिए फांसी दे दी गई थी।
उसके आखिरी पलों में... हिटलर की फौज ने उसके साथियों के नाम बताने के बदले उसकी जान बख्शने की पेशकश की। उसने मना कर दिया, और कहा: "मैं अपने लोगों की गद्दार नहीं हूं। जिनके बारे में तुम पूछ रहे हो, वे तब सामने आएंगे जब वे सभी बुरे लोगों को, आखिरी वाले तक, खत्म करने में कामयाब हो जाएंगे।"
यह लड़की, सिर्फ़ 17 साल की थी जब इसे मौत की सज़ा सुनाई गई।
वो बोली- मैं चाहती हूं कि यह पता चले, और यह कि मैं याद किए जाने की हकदार बनी रहूं, यह भी सच है कि वह मौत से डरती थी, हां, लेकिन वह इतनी बहादुर थी कि उसने अपने देश के लोगों को धोखा देने के बजाय फांसी पर चढ़ना पसंद किया।

सुंदर प्रेरणादायक लेख
जवाब देंहटाएंनमन |
जवाब देंहटाएंबताने के लिए बहुत धन्यवाद । नमस्ते ।
जवाब देंहटाएंयह कहानी पढ़कर मन भारी हो जाता है, दोस्त। सत्रह साल की उम्र में इतना साहस कोई साधारण बात नहीं होती। लेपा रैडिच ने डर को महसूस किया, फिर भी उसने अपने लोगों से गद्दारी नहीं की। उसने साफ़ कहा कि वह सच के साथ खड़ी रहेगी, चाहे कीमत जान ही क्यों न हो।
जवाब देंहटाएंबहुत प्रेरणादायक
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