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सोमवार, 20 नवंबर 2023

बीज मंत्र... वो छोटे मंत्र जो ब्रह्मांड निर्माण के समय ध्वनि तरंगों से पैदा हुए


 बीज मंत्र बहुत शक्तिशाली मंत्र है जिनका उपयोग हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के आह्वान के लिए किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह छोटे मंत्र ब्रह्मांड के निर्माण के दौरान बनाई गई ध्वनि तरंगों से पैदा हुए थे। इनमें से प्रत्येक मंत्र एक अर्थ से जुड़ा हुआ है। 

प्रत्येक बीज मंत्र के जाप के दौरान जो ध्वनि आवृत्ति बनती है, वह देवी का आह्वान करने का काम करती है। उनकी ब्रह्मांडीय ऊर्जा को शरीर में प्रवाहित करने में मदद करती है। यदि कोई दिव्य आकृतियों की शक्तियों को प्राप्त करने का इरादा रखता है, इन मंत्रों का जाप लगातार इस संदर्भ में चमत्कारी काम करता है। 

वास्तव में प्रत्येक देवता को समर्पित मंत्रों का जाप करना और उनमें बीज मंत्र जोड़ना, यह देवी-देवताओं को अधिक प्रसन्न करता है। इन बीज मंत्रों में शक्ति होती है। ये शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखते हैं।

बीज मंत्र एकल या मिश्रित शब्द होते हैं, जहां शक्ति शब्द की ध्वनि में निहित होती है।

बीज मंत्र कैसे मदद करते हैं 

बीज मंत्र जाप के दौरान बोले जाने वाले प्रत्येक शब्द का एक महत्वपूर्ण अर्थ होता है, क्योंकि यह मंत्र की नींव बीज की तरह होती है। लेकिन शब्दों या ध्वनि को तोड़कर सरल और समझने योग्य भाषा में बदलना सही नहीं है। इन मंत्रों के पीछे के विज्ञान को समझने में काफी समय लग सकता है, फिर भी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाते हैं। ये प्राकृतिक रूप से प्रकट हुए हैं। इसके बाद ऋषियों द्वारा उनके छात्रों तक पहुंचा और अंत में शेष दुनिया में इसका प्रसारा हुआ। समय के साथ इन मंत्रों ने अपना स्थान बना लिया है। कई अलग-अलग बीज मंत्र हैं, जो अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित हैं। लेकिन ऐसे बीज मंत्र भी मौजूद हैं, जो विभिन्न ग्रहों को समर्पित हैं, जिनके उपयोग से उस ग्रह को शांत किया जा सकता है, जो व्यक्ति विशेष की कुंडली में गड़बड़ी का कारण बन रहा हो या खुद को ग्रह के अशुभ प्रभावों से बचाना हो।

ये बीज मंत्र अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावी हैं। जब दृढ़ विश्वास और पवित्र मन से इनका जाप किया जाता है, तो जातक की कोई भी इच्छा पूरी हो जाती है। इस मंत्र का जाप करने के लिए मन का स्थिर एवं शांत होना जरूरी है। शांत मन और ध्यान केंद्रित करने के लिए निरंतर "ओम" मंत्र का उच्चारण किया जा सकता है। इसके बाद विशिष्ट बीज मंत्र का जाप शुरू करना चाहिए। मंत्र को एक समान "ओम" से समाप्त करने से मंत्र पूरे चक्र में आ जाता है।

बीज मंत्रों का जाप कैसे करें 

कहते हैं तन स्वच्छ तो मन स्वच्छ। इसलिए जब भी बीज मंत्रों के जाप की शुरुआत करें, तो उससे पहले स्नान कर लें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।

सुबह-सुबह इस मंत्र का जाप करना चाहिए। यदि किसी कारणवश आप मंत्र जाप करने से पहले स्नान नहीं कर सकते हैं तो खुद पर पानी की कुछ बूंदें छिड़कें। इसके बाद सफ मन से मंत्र जाप शुरू करें।

मंत्र जाप करने के लिए मन शांत होना चाहिए। शांत मन के लिए ध्यान केंद्रित करना होता। इसलिए जब भी मंत्र जाप करें, एक शांत और खाली स्थान पर बैठें। मंत्र जाप के लिए हमेशा ऐसा स्थान चुनें, जहां कोई मौजूद न हो और कोई भी आपको 30 से 40 मिनट तक परेशान न करे। समय सीमा आप अपने हिसाब से निर्धारित कर सकते हैं।
शब्द और उच्चारण बीज मंत्रों की शक्ति को उजागर करने की कुंजी हैं। हर शब्दांश का स्पष्ट रूप से बहुत दृढ़ संकल्प के साथ उच्चारण करने का प्रयास करें। बीज मंत्रों का जाप करने के सही तरीके पर मार्गदर्शन करने के लिए आप गुरु की मदद ले सकते हैं।
यदि लंबे समयवधि तक मंत्र जाप करने के बावजूद कोई अच्छा परिणाम न मिले, तो हार न मानें। ध्यान रखें कि हर मंत्र को काम करने में समय लगता है। इस प्रक्रिया और स्वयं पर संदेह न करें। खुद पर विश्वास रखें। अगर आपने साफ मन से मंत्रों का जाप किया है, तो अंतिम रूप से अच्छे परिणाम जरूर मिलेंगे। बस थोड़ा सा धैर्य बनाए रखें।
सर्वोत्तम परिणाम देखने के लिए दिन में कम से कम 108 बार मंत्र का जप करें।
आप मंत्राें का उच्चारण करने से पहले खुद को ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करें। ध्यान आपको शांति प्राप्त करने में मदद करता है। साथ ही ध्यान करने की वजह से तनाव दूर होता है और आत्मा स्थिर होती है।

महत्वपूर्ण बीज मंत्र 
मूल बीज मंत्र "ओम" है। यह वह मंत्र है, जिससे अन्य सभी मंत्रों का जन्म हुआ है। प्रत्येक बीज मंत्र से एक विशिष्ट देवी-देवता जुड़े हुए हैं। बीज मंत्र के प्रकार हैं- योग बीज मंत्र, तेजो बीज मंत्र, शांति बीज मंत्र और रक्षा बीज मंत्र।

ह्रौं
यह शिव बीज मंत्र है। यहां "ह्र" का अर्थ शिव और "औं" का अर्थ सदाशिव है। भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव को ध्यान में रखकर ही इस मंत्र का जाप करें।

दूं
यह मंत्र देवी दुर्गा को समर्पित है। उनका आशीर्वाद और उनसे सुरक्षा प्राप्त करने के लिए इसका जाप किया जाता है। "द’’ का मतलब दुर्गा और "ऊ" का मतलब सुरक्षा है। यहां बिन्दु क्रिया (प्रार्थना) है। यह मंत्र देवी दुर्गा की ब्रह्मांड की मां के रूप में स्तुति करता है।

क्रीं
यह मंत्र मां काली को समर्पित है। इस मंत्र में विशेष शक्तियां हैं, जो माता पार्वती के अवतारों में से एक मां काली को प्रसन्न करती है। यहां "क" का अर्थ है मां काली, "र" ब्रह्म है और "ई" महामाया है। कुल मिलाकर इस मंत्र का अर्थ है कि महामाया मां काली मेरे दुखों का हरण करो।

गं
यह बहुत ही शुभ मंत्र है। यह बीज मंत्र भगवान गणेश से संबंधित है। "ग" गणपति के लिए उपयोग किया गया है और बिंदु दुख का उन्मूलन है अर्थात श्री गणेश मेरे दुखों को दूर करो।

ग्लौं
यह भी गणेश के बीज मंत्रों में से एक मंत्र है। यह मंत्र भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए है। इसमें "ग" स्वयं भगवान गणेश हैं, "ल" का अर्थ है व्याप्त है और "औं" का अर्थ है प्रतिभा।

ह्रीं
यह देवी महामाया बीज मंत्र है, जिसे ब्रह्मांड की माता भुवनेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां "ह" का अर्थ है शिव, "र" प्रकृति है और "ई" महामाया और ‘बिंदु’ दुख हर्ता है। इस मंत्र को दुर्भाग्य को दूर करने के लिए सहायक माना जाता है।

श्रीं
यह लक्ष्मी बीज मंत्र है। इस मंत्र को धन प्राप्ति के लिए जप किया जाता है। इस मंत्र में "श्र" महालक्ष्मी के लिए है, "र" धन के लिए है और "ई" पूर्ति के लिए है। जब कोई धन और समृद्धि के लिए महालक्ष्मी को जगाने की कोशिश कर रहा हो, तो उसे इस मंत्र का जाप करना चाहिए। यह बीज मंत्र बहुत फायदेमंद है।

ऐं
इस बीज मंत्र से मां सरस्वती का आविर्भाव होता है। अगर कोई ज्ञान और शिक्षा के लिए प्रार्थना करना चाहता है, तो यह बीज मंत्र आवश्यक है। मां सरस्वती शिक्षा, ज्ञान, संगीत और कला की देवी हैं। यहां "ऐं" का अर्थ है, हे मां सरस्वती।

क्लीं
यह बीज मंत्र भगवान कामदेव के लिए है। वह प्रेम और इच्छा के देवता हैं। इस बीज मंत्र के जरिए कामदेव की प्रार्थना की जाती है। यहाँ "क" का अर्थ कामदेव है, "ल" इंद्र देव के लिए है और "ई" संतुष्टि के लिए है।

हूं
यह शक्तिशाली बीज मंत्र भगवान भैरव से जुड़ा है। भगवान भैरव, भगवान शिव के उग्र रूपों में से एक हैं। इस मंत्र में "ह" भगवान शिव है और "ऊं" भैरव के लिए है। कुल मिलाकर इस मंत्र का अर्थ है, हे शिव मेरे दुखों को नाश करो।

श्रौं
भगवान विष्णु के रूपों में से एक भगवान नृसिंह इस शक्तिशाली बीज मंत्र से उत्पन्न होते हैं। "क्ष" नृसिंह के लिए है, "र" ब्रह्म हैं, "औ" का अर्थ है ऊपर की ओर इशारा करते हुए दांत और "बिंदु" का अर्थ है दुख हरण। इस मंत्र के माध्यम से ब्रह्मस्वरूप नृसिंह से प्रार्थना की जा रही है कि हे भगवान मेरे दुखों को दूर करो।

- अलकनंदा स‍िंंह 

https://www.legendnews.in/single-post?s=beej-mantras-those-small-mantras-that-were-born-from-the-sound-waves-created-during-the-creation-of-the-universe-12815 

शुक्रवार, 22 सितंबर 2023

'ऋग्वेद' का 'नासदीय सूक्त' देता है ब्रह्मांड की उत्पत्ति को लेकर हर सवाल का जवाब

हम सभी के मन में कभी न कभी ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर इस ब्रह्मांड की रचना कैसे हुई। जब स्टीफन हॉकिंग की ब्रह्मांड के जन्म को लेकर 'बिग बैंग' थ्योरी आई थी तो लोगों की इस विषय के बारे में जानने की उत्सुकता और बढ़ गई, लेकिन साथ ही साथ इस बात को लेकर बहस भी छिड़ गई कि ब्रह्मांड के निर्माण को लेकर दी गई इस वैज्ञानिक व्याख्या से बहुत पहले ही वेद इससे जुड़े कई तथ्य बताये जा चुके हैं जो बिग बैंग थ्योरी के काफी करीब हैं। बिग बैंग थ्योरी में इस बात की व्याख्या करने की कोशिश की गई है कि किस प्रकार करीब 15 अरब साल पहले इस ब्रह्मांड की रचना हुई थी। ऋग्वेद में काफी दिलचस्प तरीके से ब्रह्मांड की रचना की प्रक्रिया बताई गई है। 

 ​ब्रह्मांड बनने से पहले की स्थिति कैसी थी​ 
ब्रह्मांड के निर्माण को लेकर अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग व्याख्या की गई है। सनातन धर्म में 'ऋग्वेद' का 'नासदीय सूक्त' ब्रह्मांड की उत्पत्ति को लेकर कई आश्चर्यजनक व्याख्या करता है। 

इसमें बताया गया है कि ब्रह्मांड बनने से पहले की स्थिति कैसी थी, फिर ब्रह्मांड बनने की शुरुआत कैसे हुई और कैसे इसका विस्तार होता चला गया। यह बेहद दिलचस्प और सोचने वाली बात है कि आज जब विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है, तब भी वह बड़ी मुश्किल से ब्रह्मांड की संरचना को लेकर कुछ ही मुद्दों पर बात कर सकता है जबकि सनातन धर्म में इसकी चर्चा हजारों साल पहले की जा चुकी है। 

नासदीय सूक्त ऋग्वेद के 10 वें मण्डल का 129 वां सूक्त है। 'नासद्' (= न + असद् ) से आरम्भ होने के कारण इसे 'नासदीय सूक्त' कहा जाता है। इसका सम्बन्ध ब्रह्माण्ड विज्ञान और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के साथ है। विद्वानों का विचार है कि इस सूक्त में भारतीय तर्कशास्त्र के बीज छिपे हैं।

सोचने की बात यह भी है कि आविष्कार के बिना महर्षियों ने आखिर कैसे इस बात को समझा होगा, जाना होगा और इसे पुख्ता किया होगा।


ब्रह्मांड के रहस्यों से जुड़े सवालों के जवाब मिलते हैं​ 
ऋग्वेद के 'नासदीय सूक्त' में ब्रह्मांड से जुड़ी सारी जानकारियां सूक्ति के माध्यम बताई गई हैं लेकिन इन सूक्तियों का अर्थ स्पष्ट और सरल नहीं है इसलिए आम लोगों के लिए इसे समझना मुश्किल है। हालांकि कई जानकारों द्वारा इन सूक्तियों की व्याख्या सरल शब्दों में की गई है ताकि इससे मिली जानकारी वैज्ञानिक शोधों में इस्तेमाल की जा सके। नासदीय सूक्त में सात ऐसे मंत्र या सूक्ति बताये गये हैं जिसके माध्यम से ब्रह्मांड के रहस्यों से जुड़े सवालों के जवाब मिलते हैं।  

ब्रह्मांड की रचना से पहले न तो अंतरिक्ष था, न समय​ 
पहले सूक्त के अनुसार ब्रह्मांड की रचना से पहले ना तो 'सत् (जो है)' था, ना ही 'असत् (जो नहीं है)' था; ना ही आकाश था, ना ही पृथ्वी थी और ना ही पाताल लोक था। यानि ब्रह्मांड की रचना से पहले न तो अंतरिक्ष था, न समय और न ही कोई भौतिक पदार्थ। केवल शून्य और अंधकार था। बिग बैंग थ्योरी के अनुसार भी अंतरिक्ष पहले से मौजूद नहीं था बल्कि इसकी रचना बहुत ही अजीबोगरीब स्थिति में हुई है। उनके अनुसार इसकी शुरुआत सबसे पहले ब्लैक होल के केंद्र भाग में मौजूद ‘विलक्षणता’ (सिंगुलैरिटी) से हुई होगी, जहाँ एक अनंत घनत्व वाला सूक्ष्म बिंदु आया और उसमें विस्फोट हुआ। यही घटना 'बिग बैंग' कहलाई। उस विस्फोट से न केवल 'द्रव्य-पदार्थ' का निर्माण हुआ बल्कि 'अंतरिक्ष' और 'समय' की भी रचना हुई। वेद के अनुसार ब्रह्मांड के निर्माण के समय जो 'नाद' अर्थात् 'ध्वनि' उत्पन्न हुई थी, वह था 'अम्भास' और बिग बैंग के अनुसार वह ध्वनि 'ऊँ' से मिलती-जुलती थी। 

जल के समान हर ओर अंधकार था 
दूसरे सूक्त के अनुसार उस समय न तो 'मृत्यु' थी और न ही अमरता। दिन-रात का भी नामो-निशान नहीं था। जल के समान हर ओर अंधकार था। केवल एक ऊर्जा अस्तित्व में थी, जिसमें वायु की अनुपस्थिति थी। उन्होंने इस ऊर्जा के स्रोत को 'परम तत्व' कहा और यह भी बताया कि इसी ऊर्जा से ब्रह्मांड में अन्य चीजों का जन्म हुआ है, केवल प्राण को छोड़कर। इस परम तत्व से बाकी चीजें ऐसे बाहर निकलकर आईं, जैसे फेफड़े से एक झोंके के रूप में हवा बाहर निकलकर आती है। वेद में बताये गये ऊर्जा के स्रोत 'परम तत्व' की व्याख्या जैसी ही व्याख्या भी बिग बैंग थ्योरी करता है। उनका भी मानना है कि जब अंतरिक्ष की रचना हुई थी, तो वह बहुत गर्म था और आज जो चार मूलभूत बल ( गुरुत्वाकर्षण बल, विद्युत चुम्बकीय बल, न्यूक्लियर फोर्स और वीक इनटेरेक्शन फोर्स) काम करते हैं, उस समय वे सब मिलकर एक थे। जैसे-जैसे ब्रह्मांड ठंडा होता गया, ये सारे बल अलग होते चले गये। उनका मानना है कि आज जो भी चीजें मौजूद हैं, उन सबकी उत्पत्ति ब्रह्मांड से ही हुई है, जिसे वेद ने 'परम तत्व' कहा है। वेद में दिन और रात नहीं होने की बात भी प्रमाणित होती है क्योंकि उस वक्त सूर्य और चंद्रमा का निर्माण नहीं हुआ था, तो दिन और रात होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। 

ब्रह्मांड में पहले केवल अंधेरा था ​
घटना को समझना असंभव था। पहले एक लहराता द्रव्य अस्तित्व में आया, जिसे 'सलिल' कहा गया और उसके आसपास एक हल्का पदार्थ फैला था जिसे 'अभु' कहा गया। उनके अनुसार वह शायद ऊष्मा से विकसित हो गया था। वेद में यहाँ तारों और आकाशगंगा के निर्माण की बात कही जा रही है। बिग बैंग थ्योरी के अनुसार भी शुरुआती के कुछ लाख वर्ष तक 'पदार्थों' और 'ऊर्जाओं' का निर्माण होता रहा, इसी प्रक्रिया को ऋषियों ने रहस्यमयी घटना कहा था। उन वर्षों में 'फोटॉन', 'इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन' से टकराता रहा और उसने एक अपारदर्शी द्रव्य का निर्माण किया। लगभग एक लाख वर्ष बाद जब ब्रह्मांड का तापमान कम हुआ, तो प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन ने मिलकर हाईड्रोजन परमाणु का निर्माण किया। हाईड्रोजन पारदर्शी होता है, जिसने उस सैकडों सालों से बन रहे उन अपारदर्शी द्रव्यों को पारदर्शी किया जिसे हम आज अंतरिक्ष कहते हैं। बाद में धीरे-धीरे आकाशगंगा और तारों का निर्माण होना भी शुरु हुआ। 

उस समय ब्रह्मांड में कोई दिशा नहीं थी​ 
आगे की सूक्तियों में ऋषि यह बताते नजर आते हैं कि कैसे अंतरिक्ष में छोटे-बड़े 'गेलेक्सीज' का निर्माण हुआ। इन गेलेक्सीज में काफी मात्रा में गैस और धूल थी, जिससे 'ग्रहों', 'उपग्रहों' और 'उल्का पिंडों' का निर्माण हुआ। इस सिद्धांत के लिए सूक्त में 'स्वध' और 'प्रयति' शब्द का इस्तेमाल हुआ है। वो दिशाओं के बारे में भी बताते हैं कि उस समय ब्रह्मांड में कोई दिशा नहीं थी। ऊपर किसे कहें या नीचे किसे कहें, या तिरछा किस तरफ है, कहा नहीं जा सकता था। बाद की सूक्तियों में वह यह सवाल करते नजर आते हैं कि यह बताना बहुत मुश्किल है कि सबकुछ की रचना कैसे हुई। कोई नहीं जानता कि जीवन और जीव की शुरुआत कैसे हुई? कोई नहीं बता सकता कि ईश्वर के सहयोग से सबकुछ अस्तित्व में आया या नहीं? कोई नहीं जानता कि इस ब्रह्मांड का सर्वेसर्वा कौन है? ऋषि अनुमान लगाते हुए कहते हैं कि शायद केवल उच्च शक्ति ही है, जो बता सकती है कि ब्रह्मांड की रचना कैसे हुई या फिर क्या पता उस उच्च शक्ति के ऊपर भी कोई शक्ति हो।

नासदीय सूक्त में रिसर्च से जुड़े सवालों के जवाब पहले से मौजूद थे​ 
खैर, बिंग बैंग थ्योरी भी ब्रह्मांड के केवल शुरुआती प्रक्रिया की व्याख्या करता है और वह भी आगे कहीं बन कहीं पहेली बनकर रह जाता है या ईश्वर जैसे शब्दों से जुड़ जाता है। उसके पास भी सारे सवालों के जवाब नहीं हैं। लेकिन भले ही आज आधुनिक शोधकर्ता, ब्रह्मांड के आगे के सवालों के जवाब ढूंढ रहे हों, वो इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि 'नासदीय सूक्ति' में उनकी शुरुआत के रिसर्च से जुड़े सवालों के जवाब पहले से मौजूद थे।