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गुरुवार, 27 मई 2021

बाहर आने लगी है “भगवानों” की संस्‍था #IMA के भीतर की गंदगी

 योग गुरू बाबा रामदेव द्वारा ऐलोपैथी को एक असफल चिकित्सा पद्धति कहे जाने के बाद से ऐलोपैथी डॉक्‍टरों की स्वयंसेवी संस्था “आईएमए” भड़की हुई है, इसकी उत्‍तराखंड शाखा ने तो योगगुरू पर 1000 करोड़ का मानहान‍ि केस तक दायर कर द‍िया है, साथ ही आईएमए के राष्‍ट्रीय महासचिव डॉ. जयेश लेले ने दिल्ली के आईपी एस्टेट थाने में शिकायत दर्ज कराई है, तो दूसरी ओर धर्मांतरण के लिए अपने कार्यालय का दुरुपयोग करने के लिए @IMAIndiaOrg प्रमुख डॉ जॉनरोस ऑस्टिन जयालाल के खिलाफ भी आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है।

मैं आज यहां बाबा रामदेव के पक्ष में कुछ नहीं ल‍िख रही क्‍योंक‍ि ज‍िस तरह आधा सच नुकसान दायक होता है उसी तरह सही समय और सही मंच पर ना बोला सत्‍य भी गर‍िमाहीन हो जाता है, बाबा ने ऐसा ही सत्‍य बोला है।

इस पूरे घटनाक्रम में अब तक कथ‍ित “भगवानों” की संस्‍था “आईएमए” के भीतर की गंदगी, लोगों की सेहत से ख‍िलवाड़ करती देशद्रोही गत‍िव‍िध‍ियां सामने आ रही हैं। ऐलोपैथ‍ी से रोगों का इलाज़ करने वाले भारतीय डॉक्‍टरों के प्रत‍ि जनता के “अव‍िश्‍वास” को 327,207 डॉक्‍टरों की संस्‍था आईएमए के अपने रवैये ने और पुख्‍ता कर द‍िया है क‍ि उसे बाबा के बयान पर तो घोर आपत्‍त‍ि है परंतु वो उन प्रश्‍नों का जवाब नहीं देना चाहती जो स्‍वयं उसे ही कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।

जैसे क‍ि-

1. सरेआम ह‍िंदुओं का ईसाई धर्मांतरण करने में ल‍िप्‍त आईएमए के मौजूदा अध्‍यक्ष डॉ. जॉनरोज ऑस्टीन जयलाल के बयान क‍ि “सरकार और डॉक्‍टरों ने नहीं कोरोना को तो यीशु ने भगाया, इसल‍िए कोरोना से बचना है तो यीशु की शरण में आओ”, को क्‍या कहेंगे।

2. व‍िदेशी फार्मा कंपन‍ियों के साथ दशकों पुरानी लॉब‍िंग से भारी धन लेकर उनके प्रोडक्‍ट का प्रचार, आयुर्वेद सह‍ित अन्‍य च‍िक‍ित्‍सा पद्धत‍ियों के प्रत‍ि घृणा और भ्रम को बढ़ाना क्‍या है, इसके ल‍िए संस्‍था को व‍िदेशों से भारी रकम भी प्राप्‍त हुई।

3.  आईएमए ने 2007 में Pepsico कंपनी से 50,00,000 में उसके उत्‍पादों का व‍िज्ञापन करने का करार क‍िया जबक‍ि ट्रॉप‍िकाना जूस, सीर‍ियल, ओट्स सह‍ित उसके सभी प्रोडक्‍ट भारी कैलोरीज, बच्‍चों की लंबाई कम करने और मोटापा बढ़ाने वाले साब‍ित हुए। #CorporateDalals की भंत‍ि ब्रि‍टिश कंपनी Reckitt के उत्‍पाद Dettol Soap, Dettol व Lyzol को प्रचार‍ित क‍िया, इसी कड़ी में Dabur, ICICI , procter & gamble , Abbott india भी तो हैं।

4. इसी तरह एलईडी बल्ब, वॉल पेंट, पंखे, साबुन, तेल, वाटर प्यूरीफायर आदि को सर्टिफिकेट बांटना है? दरअसल रामदेव की वजह से उनकी दुकान बंद है, जिनकी स्थानीय/विदेशी कंपनियां पैसे से सर्टिफिकेट बांट रही हैं।

5. इसके अलावा प्लाईवुड, कोलगेट, टायलेट क्लीनर आदि प्रोडक्ट्स को बैक्टीरिया फ्री, वायरस फ्री और अमका फ्री ढिमका फ्री का सर्टिफिकेट भी तो आईएमए ही बांट रही है।

6. संस्‍था पदाध‍िकारी सह‍ित कमोवेश सभी ऐलोपैथ‍िक डॉक्‍टर्स व‍िदेश यात्रायें, बच्‍चों की पढ़ाई और मीट‍िंग्‍स,कॉ्रेंसेस तक स्‍पांसर कराते हैं, आख‍िर ये उसे कैसे जायज ठहरायेंगे। उनके पास फार्मा कंपनी के साथ साथ पैथ लैब्स,  मेडिकल र‍िप्र‍िजेंटेट‍िव, मेडिकल स्‍टोर्स के साथ साथ स्‍वयं की ऊंची फीस व हर स्‍टेप पर कमीशनखोरी से होने वाली अत‍िर‍िक्‍त कमाई के व्यवसायि‍क मॉडल पर है कोई जवाब।

आईएमए के ल‍िए बाबा का मौजूदा बयान तो बहाना बन गया क्‍योंक‍ि बाबा के देशी प्रोडक्‍ट इस संस्‍था के ईसाई धर्मांतरण मानस‍िकता वाले अध्‍यक्ष डॉ. जॉनरोज ऑस्टीन जयलाल को वैयक्‍त‍िक रूप से और संस्‍था से जुड़े व‍िदेशी ब्रांड्स को आर्थ‍िकरूप से नुकसान पहुंचा रहे थे, सो ये तो पुरानी खुन्‍नस है, न‍िकलनी ही थी।

बाबा का कुसूर इतना था क‍ि उन्‍होंने बड़बोलापन द‍िखाते हुए आचार्य सुश्रुत द्वारा “निदान स्थानम” में ल‍िखी बात ही दोहरा दी थी क‍ि-
“यद‍ि कोई एक चिकित्सा उपचार, बीमारी (जैसे क‍ि कोरोना) के कारण का इलाज करने में विफल रहता है और इसके अपने दुष्प्रभाव (sideeffect) होते हैं जिससे कई अन्य बीमारियां (Black fungus) जन्‍म लेती हों तो वह एक “असफल चिकित्सा पद्धति” है।

ज़ाह‍िर है कि लगभग  7000 cr के कोव‍िड धंधे में हजारों करोड़ के प्राइवेट हॉस्पिटल, ज‍िनका एक-एक दिन का चार्ज लाखों मेें होता है, की अगर कोई ऐसे पोल खोलेगा तो बुरा तो लगेगा ही ना, आईएमएम को भी लग गया और ठोक द‍िया बाबा पर मुकद्दमा, देखते हैं अब ऊँट क‍िस करवट बैठता है।

- अलकनंदा स‍िंंह 

http://legendnews.in/the-filth-inside-the-gods-organization-has-started-coming-out/

शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

गुरूदीक्षा लेने के कुचक्र के आफ्टरइफेक्‍ट हैं ये सब...

अभीतक तथाकथित आधुनिकता की आड़ में जो लोग ज्‍योतिषीय आंकलन को ढपोरशंखी बताया करते थे, वे इस प्राचीन  विद्या के वैज्ञानिक पक्ष से पूर्णत: अनभिज्ञ रहे और हम सतही जानकारियों के बूते इस विज्ञान का दुरुपयोग करने वाले  उन ''पंडितों'' के दुष्‍चक्र में फंसते चले गए जो आमजन से लेकर संभ्रान्‍तजन तक को बरगला कर अपना ''धंधा'' चलाते  रहे। इन पंडितों और ऐसे ही अन्‍य धंधेखोरों के कारण ज्‍योतिष को बतौर 'नक्षत्र विज्ञान' कब का भुलाया जा चुका है।  अभी भी इसके बारे में बात करने भर से आपको दकियानूसी, पिछड़ा, दक्षिणपंथी या समाज की प्रगति का दुश्‍मन आदि  कुछ भी कहा जा सकता है...।

कॉस्‍मिक किरणें-दिशा ज्ञान और नक्षत्र विज्ञान पर यूं तो कितना ही कुछ शोधों के द्वारा सिद्ध किया जा चुका है मगर  इस पर बात फिर कभी करेंगे। फिलहाल इसी नक्षत्र-विज्ञान के अनुसार सौरमंडल में जो कुछ ग्रह अपनी वक्र गति (  retrogate) से चल रहे हैं उनके कारण समाज में जो कुछ भी गलत हुआ है उसकी साफसफाई का समय आ गया है और  इसी कारण दशकों से जमे ''बाबाओं'' के डेरे-आश्रमों से लेकर विदेश के स्‍थापित साम्राज्‍यों व विनाशक शक्‍तियों तक सभी  में उथलपुथल मची है...प्रकृति का मंथन तेज हो रहा है ताकि जो अग्रहणीय है उसे निकाल बाहर किया जाए और इस  तरह ये मंथन-गति संतुलन की ओर बढ़ रही है ।

इसी मंथन से संबंधित दो वाकये बताती हूं-  पहला तो यह कि दो दिन पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्‍यक्ष  नरेंद्र गिरि ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि फर्जी संतों-बाबाओं को सनातन धर्म की परंपराओं से खिलवाड़ नहीं करने दिया  जाएगा। हम इसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे।  कल इसी संदर्भ में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्‍वयंभू संत  महात्‍माओं को फर्जी बताते हुए उन्हें साधु संन्‍यासी संत या बाबा मानने से इंकार कर दिया है। इतना ही नहीं इन्‍हें संत  या महात्‍मा कहे जाने पर भी आपत्‍ति जताई है क्‍योंकि ये सनातन हिंदू परंपरा या अखाड़ा व्‍यवस्‍था के अंग नहीं हैं और  न ही ये साधु संन्‍यासी हैं। परिषद की ओर से सभी 13 अखाड़ों को एडवाइजरी जारी की गई है कि उन्‍हें अपने यहां  स्‍थापित समिति के अनुमोदन के बाद ही संतों महामंडलेश्‍वरों को मान्‍यता दिये जाने की सलाह दी है। इन 13 अखाड़ों में  निरंजनी, आनंद, महानिर्वाणी, अटल, बड़ा उदासीन, नया उदासीन, निर्मल अखाड़ा,जूना, अव्‍हान,अग्‍नि, दिगंबर  अणि,निर्वाणी अणि और निर्मोही अणि शामिल हैं।

दूसरा वाकया है कि -  कल जिस समय अखाड़ा परिषद हरिद्वार में ये एडवाइजरी जारी कर रही थी ठीक उसी समय  धर्मनगरी हरिद्वार से ही ताल्लुक रखने वाले एक पीठाधीश्वर रहे एक 'बाबा' का बीच सड़क कार की बोनट पर लड़की को  'किस' करते फोटो के सोशल मीडिया पर वायरल होने से चर्चाओं का बाजार गरम है, फोटो लोकेशन दिल्ली-आगरा यमुना  एक्सप्रेस हाईवे की बताई जा रही है, इस पर अधिकारिक रूप से मुंह खोलने को तैयार नहीं। मामले की जानकारी और  फोटो अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद तक भी पहुंचा दी गई।

फोटो में दिख रहे बाबा हरिद्वार-देहरादून रोड पर स्थित एक आश्रम से जुड़े बताए जा रहे हैं हालांकि इन कथित बाबा के  चेलों द्वारा सफाई दी जा रही है कि फोटो पुराना है और वह काफी समय पहले हरिद्वार से दिल्ली आश्रम चले गए हैं  और अब वह कभी-कभार ही यहां आते हैं। उन्होंने दिल्ली स्थित आश्रम में ही अपना स्थायी डेरा बना लिया है मगर ये  तो सफाईभर है ना। अभी हम इतने आधुनिक भी नहीं हुए हैं कि एक पीठाधीश्वर संत को सरेआम किस करते और  सामाजिक सभ्‍यता के मापदंडों व मर्यादाओं की धज्‍जियां उड़ाते देखते रहें और प्रतिक्रिया भी ना दें।

हम सब जानते हैं कि सनातन धर्म में गृहस्‍थ संतों को भी उतना ही महत्‍व दिया जाता रहा है जितना कि वैरागियों को  मगर उच्‍छृंखलता को न कोई समाज मान्‍यता देता है और ना ही धर्म। समाज में व्‍यवस्‍था बनाए रखने के कुछ नियम  होते हैं, और धर्म संवाहकों से इन्‍हें मानने की अपेक्षा सर्वाधिक होती है। मंदिरों-मठों में व्‍यभिचार की खबरें पहले भी आती  रही हैं मगर अब ये सीमायें पार कर चुकी हैं। इनकी सफाई इनके भीतर से ही शुरू होनी चाहिए। गेरुए वस्‍त्रों की महिमा  और सनातन धर्म की खिल्‍ली इस 'बाबा' जैसे न जाने ''कितने और बाबा'' उड़ा रहे होंगे, इस संबंध में अखाड़ा परिषद को  सिर्फ एडवाइजरी जारी करके ही नहीं चुप रह जाना चाहिए बल्‍कि उन बाबाओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी करनी  चाहिए। आज सड़क पर किस करते बाबा का फोटो वायरल हुआ है, कल को कोई ऐसा ही बाबा सड़क पर शारीरिक संबंध  बनाता दिख जाए तो फिर आश्‍चर्य कैसा, बेलगाम इच्‍छाऐं और धर्म की आड़ में इन बाबाओं की असलियत सामने आनी  ही चाहिए।

इसके साथ ही हमें ''गुरूदीक्षा लेने के कुचक्र'' की ओर भी ध्‍यान देना होगा जो हमारे आसपास अंधश्रद्धा के रूप में फैलाया  जाता है कि मोक्षप्राप्‍ति के लिए किसी गुरू की का होना अति आवयश्‍क है। ये सारी बातें कतई निराधार हैं जबकि स्‍वयं  गुरुओं के गुरू दत्‍तात्रेय ने कहा है कि ये उर्वर पृथ्‍वी, ये खुला आकाश, ये बहती हवाऐं, ये जलती आग, ये बहता पानी, ये  सुबह उठता सूरज, ये रात बितातात चांद, ये इतराती तितलियां, ये शहद बनाती मक्‍खियां, ये मदमस्‍त हाथी, ये व्‍यस्‍त  चीटियां, ये जाल बुनतीं मकड़ियां, कुलांचे भरते हिरन, चहचहाती चिड़ियां, अबोध बच्‍चे, बर्बर शिकरी, जहरीले सांप, ये सब  गुरू ही तो हैं। जब प्रकृति की हर गतिविधि हमारी गुरू हो सकती है तो इन ''बाबाओं'' के कुचक्र से बचना कोई असंभव  कार्य तो नहीं। क्‍या हम गुरू दत्‍तात्रेय के कहे इन वाक्‍यों को झ़ठला सकते हैं, नहीं, इन बाबाओं को साइडबाइ करने का  एक ही फॉर्मूला है कि बस थोड़ी नजर चौकस और थोड़ी अपने प्रति विश्‍वास व अपनों के प्रति श्रद्धा...और क्‍या।

-अलकनंदा सिंह