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मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

रामधारी सिंह दिनकर की कविता से सेना ने दी Air strike पर पहली प्रतिक्रिया

पुलवामा आंतकी हमले का बदला लेते हुए इसके 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को तड़के करीब 3 बजे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई जगह भारतीय वायुसेना द्वारा एयर स्ट्राइक की।

आतंकवादी कैंपों पर हमले के बाद (Air strike by india) भारतीय सेना ने पहली प्रतिक्रिया व्यक्त की है. भारतीय सेना (Indian Army) ने राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता के जरिए भावनाओं का किया इजहार-
क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
सबका लिया सहारा
पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे
कहो, कहाँ, कब हारा?
क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
तुम हुये विनत जितना ही
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।
अत्याचार सहन करने का
कुफल यही होता है
पौरुष का आतंक मनुज
कोमल होकर खोता है।
क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित, विनीत, सरल हो।
तीन दिवस तक पंथ मांगते
रघुपति सिन्धु किनारे,
बैठे पढ़ते रहे छन्द
अनुनय के प्यारे-प्यारे।
उत्तर में जब एक नाद भी
उठा नहीं सागर से
उठी अधीर धधक पौरुष की
आग राम के शर से।
सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि
करता आ गिरा शरण में
चरण पूज दासता ग्रहण की
बँधा मूढ़ बन्धन में।
सच पूछो, तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की
सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
जिसमें शक्ति विजय की।
सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है।
-अलकनंदा सिंह

शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

एक फॉन्‍ट की ताकत: जिसने एक सत्‍ताधीश को कुर्सी से उतार फेंका


कभी कवि रामधारी सिंह "दिनकर" ने कलम का महत्‍व बताते हुए लिखा था-

दो में से क्या तुम्हें चाहिए कलम या कि तलवार 
मन में ऊँचे भाव कि तन में शक्ति विजय अपार

अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान
या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर का मैदान

कलम देश की बड़ी शक्ति है भाव जगाने वाली, 
दिल की नहीं दिमागों में भी आग लगाने वाली 

पैदा करती कलम विचारों के जलते अंगारे, 
और प्रज्वलित प्राण देश क्या कभी मरेगा मारे 

इस कविता को लिखते हुए तब के खालिस देसी समय में दिनकर जी को यह कहां पता था कि अब कलम की जगह वो  फॉन्‍ट ले लेंगे, जो एक तलवार तो क्‍या हजारों हजारों तलवारों को एक साथ काट देंगे। दिनकर जी को तो तब यह भी  कहां पता था कि इन फॉन्‍ट्स की दुनिया अधूरे और बेहाल से एक देश के प्रधानमंत्री को न सिर्फ नाकाबिल करार दे देगी  बल्‍कि उसे सपरिवार जेल की ओर धकेल देगी। जी हां, ये है आज की कलम यानि फॉन्‍ट की ताकत।

अब देखिए ना पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को इसी फॉन्‍ट की ताकत ने आज ज़मीं पर ला पटका, इस फॉन्‍ट  का नाम है ''कैलिबरी''। फॉन्‍ट की इस ताकत को देखकर आज 21वीं सदी के डिजिटल युग में कहा जा सकता है कि  अब तलवार से ज्यादा शक्तिशाली फॉन्ट है।

आज पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बहुचर्चित पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की संपत्ति  की जांच के बाद संयुक्त जांच समिति (JIT) की रिपोर्ट के आधार पर शरीफ और वित्त मंत्री इशाक डार को  अयोग्य करार दे दिया, शरीफ को इसके बाद अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

हुआ यूं कि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित JIT को मरियम शरीफ ने जाली दस्तावेजों के जरिए गुमराह  करने की कोशिश की थी। मरियम ने पनामागेट से संबंधित जो दस्तावेज भेजे थे, वो कैलिबरी फॉन्ट में टाइप थे और  दस्‍तावेजों में तारीख 31 जनवरी 2007 के पहले की थी जबकि कैलिबरी फॉन्ट 31 जनवरी 2007 से पहले  व्यावसायिक प्रयोग के लिए उपलब्ध ही नहीं था। तब जेआईटी द्वारा संदेह जताए जाने के बाद सोशल मीडिया में  मरियम नवाज शरीफ की जमकर आलोचना भी हुई। कहा जाने लगा कि बेटी की एक गलती ने बाप को कहीं का नहीं  छोड़ा एक ट्विटर यूजर ने जेआईटी के बयान के स्क्रीन शॉट भी लगाए जिस पर विवाद उठ खड़ा हुआ था, और नतीज़ा  आज दुनिया के सामने है।


क्‍या है कैलिबरी फॉन्ट

कैलिबरी फॉन्ट के चर्चा में आने का रोचक इतिहास है। इसमें रियल इटैलिक्स, स्माल कैप्स और मल्टीपल न्यूमरल सेट  होता है। वार्म एंड सॉफ्ट कैलिबरी को 2004 में लुकास डी ग्रूट ने डिजाइन किया था। एमएस ऑफिस 2007 और विंडोज  विस्टा के लांच के मौके पर कैलिबरी आम लोगों को 31 जनवरी 2007 को उपलब्ध हुआ। एमएस वर्ड में टाइम्स न्यू  रोमन और माइक्रो सॉफ्ट पावर प्वाइंट, एक्सेल, आउट लुक और वर्डपैड में एरियल की जगह डिफॉल्ट के तौर पर कैलिबरी  ने जगह ली। स्क्रीन पर दमदार दिखने वाले कैलिबरी फॉन्ट का एमएस ऑफिस के सभी वर्जन 2016 तक इस्तेमाल  करते रहे।

कुल मिलाकर हुआ ये कि पनामा की लॉ फर्म मोसेक फोंसेका के खुफिया दस्तावेज लीक होने और आज सुबह तक  पनामागेट के आफ्टर इफेक्‍ट में कैलिबरी फॉन्‍ट ने अपना नाम ऐतिहासिक रूप से दर्ज करा लिया। जो कैलिबरी फॉन्‍ट  अभी तक सिर्फ डिजिटल वर्क के लिए प्रयोग किया जाता था, अब उसे एक देश के प्रधानमंत्री को अपदस्‍थ करने के लिए  याद किया जाएगा। इसीलिए आज दिन भर ट्विटर पर चलता रहा In #Pakistan, Calibri is  the font of democracy #NawazSharif.

कवि रामधारी सिंह दिनकर तो कलम की ताकत का महत्‍व तलवार से ज्‍यादा बता गए मगर आज डिजिटल युग में  कलम को फॉन्‍ट ने जिस तरह रिप्‍लेस किया है, वह कम से कम पाकिस्‍तान के लिए तो ऐतिहासिक बन ही गया।
पाकिस्‍तान ही क्‍यों, आज यह पूरे विश्‍व का सच है।

बदलते वक्‍त ने यूं भी आज कलम और हाथ का संबंध लगभग खत्‍म सा कर दिया है। लिखने वाले किसी भी पेशे में  अब कलम की जगह कंम्‍यूटर और उससे उभरे विभिन्‍न फॉन्‍ट का ही इस्‍तेमाल होता है। लिखने-लिखाने की आदत तो  अब सिर्फ उन लोगों तक सीमित रह गई है जिन्‍हें कंम्‍यूटर का प्रयोग करना नहीं आता अन्‍यथा हाथ से लिखना अब  समय की बर्बादी लगती है।

बहरहाल, नवाज शरीफ की बेटी को भी यह इल्‍म नहीं रहा होगा कि एक अदद फॉन्‍ट की किस्‍म उनके पूरे परिवार पर  कितनी भारी पड़ने वाली है। यदि उसे ये इल्‍म रहा होता तो वह किसी कब्र में पैर लटकाकर बैठे मुंशी से ही वो दस्‍तावेज  तैयार कराकर कोर्ट के सामने लाती। हो सकता है कि आज वो मुंशी कोर्ट में गवाही के लिए मौजूद ही नहीं होता, और  होता भी तो उसे खरीदा जा सकता था।

मुंशी की हैंडराइटिंग काफी मुफीद साबित हो सकती थी किंतु अब फॉन्‍ट का क्‍या करें। वह तो ऐसी गवाही भी है और  सुबूत भी जो मियां नवाज को पूरे परिवार सहित ले डूबा। हो सकता है कि इस दौर के कवि या कथाकार अब फॉन्‍ट की  असीमित ताकत को भी अपनी रचनाओं का हिस्‍सा बनाने पर विचार करें।

-सुमित्रा सिंह चतुर्वेदी    



सोमवार, 1 अगस्त 2016

ऐ हुक्मरानो ! दिनकर जी के शब्दों को हूबहू पेश करती CAG रिपोर्ट सोचने को बाध्य तो करती होगी ना

दिनकर जी के शब्दों को हूबहू पेश करती CAG रिपोर्ट कि सीमा पर तैनात जवानों को न तो ताजा खाना मिलता है और न भरपेट

प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह "दिनकर" द्वारा रचित कविता संग्रह ''परशुराम की प्रतीक्षा '' के  खंड - 2 में  दिनकर जी ने जो उल्लेख किया है वह शब्दश: , आज सैनिकों के भोजन पर लोकसभा में पेश की गई CAG रिपोर्ट सत्य सिद्ध कर रही है।
पहले ज़रा दिनकर जी की पंक्तियां देख‍िए .... फिर वह रिपोर्ट जो पिछली कई सरकारों के रक्षा मंत्रालयों द्वारा बरती गई लापरवाही हमारे सामने लाती है कि सरहद से लेकर आपदाग्रस्त इलाकों तक आख‍िरी खेवनहार हमारी सेना के जवान आख‍िर किन परिस्थ‍ितियों में हैं ....और जो सरकारें बिना लागलपेट के अपने जनप्रतिनिध‍ियों का वेतन-बजट खुले हाथ पेश करती रही हैं , वे सरकारें सेना के जवानों के प्रति कितनी लापरवाह हैं... देख‍िए... 

हे वीर बन्धु ! दायी है कौन विपद का ?
हम दोषी किसको कहें तुम्हारे वध का ?

यह गहन प्रश्न; कैसे रहस्य समझायें ?
दस-बीस अधिक हों तो हम नाम गिनायें।
पर, कदम-कदम पर यहाँ खड़ा पातक है,
हर तरफ लगाये घात खड़ा घातक है।

घातक है, जो देवता-सदृश दिखता है,
लेकिन, कमरे में गलत हुक्म लिखता है,
जिस पापी को गुण नहीं; गोत्र प्यारा है,
समझो, उसने ही हमें यहाँ मारा है।

जो सत्य जान कर भी न सत्य कहता है,
या किसी लोभ के विवश मूक रहता है,
उस कुटिल राजतन्त्री कदर्य को धिक् है,
यह मूक सत्यहन्ता कम नहीं वधिक है।

चोरों के हैं जो हितू, ठगों के बल हैं,
जिनके प्रताप से पलते पाप सकल हैं,
जो छल-प्रपंच, सब को प्रश्रय देते हैं,
या चाटुकार जन से सेवा लेते हैं;

यह पाप उन्हीं का हमको मार गया है,
भारत अपने घर में ही हार गया है।

है कौन यहाँ, कारण जो नहीं विपद् का ?
किस पर जिम्मा है नहीं हमारे वध का ?
जो चरम पाप है, हमें उसी की लत है,
दैहिक बल को रहता यह देश ग़लत है।

नेता निमग्न दिन-रात शान्ति-चिन्तन में,
कवि-कलाकार ऊपर उड़ रहे गगन में।
यज्ञाग्नि हिन्द में समिध नहीं पाती है,
पौरुष की ज्वाला रोज बुझी जाती है।

ओ बदनसीब अन्धो ! कमजोर अभागो ?
अब भी तो खोलो नयन, नींद से जागो।
वह अघी, बाहुबल का जो अपलापी है,
जिसकी ज्वाला बुझ गयी, वही पापी है।

जब तक प्रसन्न यह अनल, सुगुण हँसते है;

है जहाँ खड्ग, सब पुण्य वहीं बसते हैं।

वीरता जहाँ पर नहीं, पुण्य का क्षय है,
वीरता जहाँ पर नहीं, स्वार्थ की जय है।

तलवार पुण्य की सखी, धर्मपालक है,
लालच पर अंकुश कठिन, लोभ-सालक है।
असि छोड़, भीरु बन जहाँ धर्म सोता है,
पातक प्रचण्डतम वहीं प्रकट होता है।

तलवारें सोतीं जहाँ बन्द म्यानों में,
किस्मतें वहाँ सड़ती है तहखानों में।
बलिवेदी पर बालियाँ-नथें चढ़ती हैं,
सोने की ईंटें, मगर, नहीं कढ़ती हैं।

पूछो कुबेर से, कब सुवर्ण वे देंगे ?
यदि आज नहीं तो सुयश और कब लेंगे ?
तूफान उठेगा, प्रलय-वाण छूटेगा,
है जहाँ स्वर्ण, बम वहीं, स्यात्, फूटेगा।

जो करें, किन्तु, कंचन यह नहीं बचेगा,
शायद, सुवर्ण पर ही संहार मचेगा।
हम पर अपने पापों का बोझ न डालें,
कह दो सब से, अपना दायित्व सँभालें।

कह दो प्रपंचकारी, कपटी, जाली से,
आलसी, अकर्मठ, काहिल, हड़ताली से,
सी लें जबान, चुपचाप काम पर जायें,
हम यहाँ रक्त, वे घर में स्वेद बहायें।

हम दें उस को विजय, हमें तुम बल दो,
दो शस्त्र और अपना संकल्प अटल दो।
हों खड़े लोग कटिबद्ध वहाँ यदि घर में,
है कौन हमें जीते जो यहाँ समर में ?

हो जहाँ कहीं भी अनय, उसे रोको रे !
जो करें पाप शशि-सूर्य, उन्हें टोको रे !

जा कहो, पुण्य यदि बढ़ा नहीं शासन में,
या आग सुलगती रही प्रजा के मन में;
तामस बढ़ता यदि गया ढकेल प्रभा को,
निर्बन्ध पन्थ यदि मिला नहीं प्रतिभा को,

रिपु नहीं, यही अन्याय हमें मारेगा,
अपने घर में ही फिर स्वदेश हारेगा।

ये तो दिनकर जी ने लिखा था जो आज हूबहू इस रिपोर्ट पर खरा उतरता है

क्या कहती है देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी CAG की रिपोर्ट 

सरहदों की रखवाली करने वाले हमारे सैनिकों को घटिया खाना परोसा जा रहा है. उन्हें पेटभर खाना भी नहीं मिल रहा है.
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात जवानों को ना तो ताजा खाना मिलता है और ना ही खाना जरुरत के हिसाब से मिलता है. इस रिपोर्ट को मौजूदा संसद के मानसून सत्र में पेश किया गया है. रिपोर्ट में सेना के महकमों के बीच में आपसी सामंजस्य की कमी और रक्षा मंत्रालय की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं.
ऑडिट एजेंसी सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि देश के सैनिकों को घटिया खाना परोसा जाता है. सीएजी के मुताबिक, सेना द्वारा खुद कराए गए सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि 68 प्रतिशत जवान उनकों परोसे जा रहे खाने को संतोषजनक या फिर निम्न-स्तर का मानते हैं.
सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि सैनिकों को निम्न-गुणवता का मांस और सब्जी खाने को दी जाती है. इसके अलावा, राशन की मात्रा भी कम दी जाती है और जो राशन दिया जाता है वो स्वाद अनुसार भी नहीं होता है.
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राशन की कमी और गुणवत्ता की सबसे ज्यादा कमी उत्तरी और पूर्वी कमांड में पाई गई है. उत्तरी कमांड की जिम्मेदारी पूरे जम्मू-कश्मीर और करगिल से सटी पाकिस्तानी सीमा और लद्दाख से सटी चीन सीमा की रखवाली करना है जबकि पूर्वी कमांड की जिम्मेदारी अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम से सटी चीन सीमा की रखवाली करना है.
कैग रिपोर्ट के मुताबिक सेना मुख्यालय द्वारा तैयार किए गए राशन-एस्टीमेट को रक्षा मंत्रालय ने 20-23 प्रतिशत तक कम कर दिया जबकि सेना ने ये राशन फिल्ड-एरिया में तैनात बटालियन और रेजीमेंट्स की वास्तविक खाद खाद्य क्षमता और उपलब्ध स्टॉक के आधार पर तैयार किया था. यही नहीं सेना के कमांड मुख्यालय और डायेरक्टर जनरल ऑफ सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट यानि डीजीएसटी के आंकडों में भी काफी अंतर पाया गया. जिसके चलते सैनिकों के राशन में घालमेंल दिखाई दिया.
रिपोर्ट में उदाहरण के तौर पर कहा गया है कि जहां कमांड मुख्यालयों ने 2013-14 में मात्र 3199 मैट्रिक टन चाय की पत्ती की मांग की थी, डीजीएसटी ने उस मांग को खुद बे खुद बढ़ाकर 2500 मैट्रिक टन कर दिया. वहीं, कमांड्स ने जब 2014-15 में करीब 46 हजार मैट्रिक टन (45,752) दाल की मांग की थी, तो डीजीएसटी ने उसे घटाकर 37 हजार मैट्रिक टन कर दिया.
ये पहली बार नहीं है कि सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में सैनिकों को मिल रहे घटिया खाने का खुलासा किया है. इससे पहले 2010 में भी सैनिकों को मिल रहे कम और निम्न-स्तर के खाने का उल्लेख किया गया था. उस रिपोर्ट के आधार पर 2013 में संसद की पब्लिक एकाउंट्स कमेटी यानि पीएसी ने रक्षा मंत्रालय को 15 प्रस्ताव दिए थे. लेकिन मौजूदा सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, उसमें से रक्षा मंत्रालय ने मात्र दो (02) प्रस्तावों को ही मंजूर किया है. और शायद यही वजह है कि छह साल बाद भी देश की सीमाओं की हिफाजत कर रहे सैनिकों को ना केवल खराब खाना परोसा जा रहा है बल्कि भरपेट खाना भी नसीब नहीं हो रहा है.
कैग रिपोर्ट के मुताबिक सेना मुख्यालय और रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों में भारी अंतर होने के चलते ही दाल, चीनी, खाने का तेल, टिन-जैम, मिल्क-प्रोडेक्ट इत्यादि जैसी चीजों की खरीद रक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृत मांग से कहीं अधिक हो गई. जिसके चलते सेना को ये चीजें स्थानीय स्तर पर खरीदनी पड़ीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यही वजह है कि सेना को अखनूर में मिल रही सब्जी नगरोटा से 29 प्रतिशत मंहगी और फल 23 प्रतिशत मंहगे प्राप्त हुए.
सीएजी के मुताबिक दाल और चीनी की मांग तो स्वीकृत मांग से 23 से 40 प्रतिशत ज्यादा थी. साथ ही रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ है कि सेना को ब्रांडेंड आटा तक नहीं मिल पा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक पीएसी के सुझाव के मुताबिक 2014 में रक्षा मंत्रालय ने ये बात स्वीकार की थी कि सेना के राशन के लिए रिक्यूस्ट फॉर प्रेपोज़ल यानि टेंडर प्रक्रिया शुरु की जायेगी लेकिन चीनी को छोड़कर किसी भी राशन के आईटम के लिए टेंडर निकाला गया.
इसके लिए मंत्रालय का जवाब है कि बाकी चीजों के लिए QUALITATIVE REQUIREMENTS यानी अनोमोदित गुणात्मक उपलब्धता नहीं थी. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने पहले ही राशन के दरों और अन्य जरूरी निर्देशन जारी कर दिए थे. शायद यही वजह है कि सैनिकों को एक्सपायरी और खराब खाना मिल रहा है.

- अलकनंदा सिंह